कर्नाटक हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि डाक विभाग की लापरवाही से 12 साल तक चले अमान्य PPF खाते पर ब्याज नहीं रोका जा सकता, जो ग्राहकों के लिए बड़ी राहत है।पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) खाताधारकों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। अगर डाकघर या बैंक की गलती से आपका पीपीएफ खाता कई सालों तक चलने के बाद ‘अमान्य’ (irregular) घोषित कर दिया जाता है, तो आपको अपनी जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज से हाथ नहीं धोना पड़ेगा। कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के नाम पर खोले गए एक पीपीएफ खाते के मामले में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 12 साल तक लगातार जमा स्वीकार करने के बाद डाक विभाग नियम उल्लंघन का हवाला देकर ग्राहक का ब्याज नहीं रोक सकता।
क्या था पूरा मामला?
मिंट की रिपोर्ट के मुतापिक यह मामला बेंगलुरु के मल्लेश्वरम डाकघर का है। ‘के शंकरलाल’ नामक एक व्यक्ति ने अपनी बेटी की शादी के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से 3 सितंबर 2009 को अपने एचयूएफ (HUF) के नाम पर पीपीएफ खाता खोला था। वे लगातार 12 वर्षों तक इस खाते में पैसे जमा करते रहे। हालांकि, केंद्र सरकार ने 13 मई 2005 को ही नियम में बदलाव करके एचयूएफ के नाम पर नया पीपीएफ खाता खोलने पर रोक लगा दी थी। डाकघर के अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह खाता खुल भी गया और 12 साल तक सुचारू रूप से चलता भी रहा। सितंबर 2021 में जब अधिकारियों को इस गलती का अहसास हुआ, तो उन्होंने खाते को ‘अमान्य’ घोषित कर दिया और बिना कोई ब्याज दिए खाता बंद करने का नोटिस जारी कर दिया।
हाईकोर्ट ने जमाकर्ता के पक्ष में क्यों दिया फैसला?
डाकघर के इस अन्यायपूर्ण फैसले के खिलाफ जमाकर्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने तर्क दिया कि उन्होंने पूरी ईमानदारी से पैसे जमा किए थे और डाकघर ने कभी भी इस नियम का जिक्र नहीं किया। 31 मार्च 2023 को दिए अपने फैसले (के शंकरलाल बनाम पोस्टमास्टर) में कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना कि डाक विभाग को अपने नियमों की पूरी जानकारी होनी चाहिए थी। अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए वे ग्राहक को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते और न ही उसका ब्याज रोक सकते हैं। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का हवाला देते हुए डाकघर की कार्रवाई को अनुचित ठहराया। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का संदर्भ देते हुए डाकघर को निर्देश दिया कि वह जमाकर्ता को लागू पीपीएफ दरों के हिसाब से पूरा ब्याज दे और मैच्योरिटी के नियमों के अनुसार खाता बंद करे।अन्य पीपीएफ निवेशकों के लिए इसके क्या मायने हैं?
इस फैसले का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर अमान्य पीपीएफ खाते को अपने आप पूरा ब्याज मिल जाएगा। अदालत का यह रुख विशेष रूप से उन मामलों पर लागू होता है जहां अधिकारियों की अपनी गलती या अनदेखी के कारण खाता सालों तक चलता रहा हो। अगर खाते में अमान्यता का कारण अलग है जैसे कि तय सीमा से अधिक राशि जमा करना तो नियम अलग हो सकते हैं। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के एक फैसले के अनुसार, सीमा से अधिक जमा की गई अतिरिक्त राशि पर ब्याज नहीं मिलता, जबकि सीमा के भीतर जमा राशि पर नियमानुसार ब्याज दिया जाता है। अगर आपका पीपीएफ खाता भी अमान्य घोषित हुआ है, तो सबसे पहले उसके कारण और परिचालन अवधि की समीक्षा करें। अगर गलती डाकघर या बैंक की तरफ से हुई है, तो कर्नाटक हाईकोर्ट का यह फैसला आपके लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है।







































