Vidya Balan on Working Hours: विद्या बालन (Vidya Balan) इन दिनों रजनीकांत (Rajinikanth) की फिल्म जेलर 2 को लेकर चर्चा में हैं। अब उन्होंने शूटिंग के समय को लेकर दिलचस्प खुलासा किया है।Vidya Balan on Working Hours: बॉलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन (Vidya Balan) अपनी फिल्मों में दमदार एक्टिंग के लिए जानी जाती हैं। इन दिनों वो सुपरस्टार रजनीकांत (Rajinikanth) की फिल्म जेलर 2 (Jailer 2) में नजर आ रही हैं। विद्या बालन की ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। फिल्म जेलर 2 अब तक बॉक्स ऑफिस पर 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन कर चुकी हैं। इन सब के बीच विद्या बालन ने Zoom को एक इंटरव्यू दिया है। इस दौरान विद्या बालन ने फिल्म में काम करने के अनुभव को लेकर बात की। विद्या बालन ने वर्किंग आवर्स को लेकर कुछ ऐसा बोल दिया है, जिसको लेकर बी-टाउन में हलचल मच गई है।विद्या बालन ने कही ये बात
विद्या बालन ने Zoom को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा, ‘तमिल इंडस्ट्री में काम करना मुझे बिल्कुल अलग या अजनबी नहीं लगा। ये दिलचस्प है, क्योंकि ये हिंदी इंडस्ट्री से अलग है। मैंने काफी लंबे समय तक शूटिंग की। आपको एहसास होता है कि हम सभी एक ही काम कर रहे हैं। हम कहानियां सुना रहे हैं, चाहे हिंदी इंडस्ट्री हो या तमिल। दोनों में कुछ समानताएं हैं और कुछ अंतर भी। उदाहरण के लिए, हमने सुबह 9 से शाम 6 बजे तक काम किया। मुझे ये देखकर बहुत अच्छा लगा, क्योंकि मुंबई में हम इससे ज्यादा घंटे काम करते हैं।’ विद्या बालन आगे कहा, ‘हिंदी इंडस्ट्री में भी काम करने का समय तय है, लेकिन हम अक्सर थोड़ी लंबी शिफ्ट में काम करते हैं। मुझे तमिल इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव बहुत अच्छा लगा। ये मेरे लिए नया अनुभव था। मैं सोचती थी कि शाम 6 बजे के बाद क्या करूं। मैं एक खूबसूरत जगह पर रह रही थी, जो समुद्र तट के करीब थी। शूटिंग के बाद मैं एक घंटे तक समुद्र किनारे टहलने जाती थी। हिंदी फिल्म की शूटिंग के दौरान मुझे ऐसी सुविधा नहीं मिलती। हालांकि, मुझे कोई शिकायत नहीं है। मुझे हर जगह काम करना पसंद है।साउथ सिनेमा में पुरुष प्रधान फिल्मों पर क्या बोलीं विद्या बालन?
इसी इंटरव्यू में विद्या बालन ने इस बात से सहमति जताई कि साउथ सिनेमा में आमतौर पर पुरुष प्रधान फिल्मों का चलन ज्यादा है। उन्होंने कहा, ‘मुझे फिल्म जेलर 2 के सेट पर ऐसा नहीं लगा कि वहां पुरुष प्रधान सोच हावी थी। साउथ की फिल्में पुरुष प्रधान होती हैं। मैंने भी इस बात पर गौर किया है। उम्मीद है कि इसमें बदलाव आएगा और इन फिल्मों में महिलाओं के लिए भी ज्यादा दिलचस्प किरदार लिखे जाएंगे।’ एक्ट्रेस ने इंडियन सिनेमा में महिला प्रधान फिल्मों की कमी पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि इसमें बदलाव आएगा। हिंदी सिनेमा में भी हम बहुत ज्यादा महिला प्रधान फिल्में नहीं देख रहे हैं। मैं चाहती हूं कि एक बार फिर ऐसा दौर आए, जब महिला प्रधान फिल्मों की संख्या बढ़े। ये बदलाव सिर्फ हिंदी सिनेमा तक सीमित न रहे, बल्कि सभी भाषाओं की फिल्मों में देखने को मिले। ऐसी कई दिलचस्प कहानियां हैं, जिन्हें पर्दे पर दिखाया जाना चाहिए।






































