MP News: मध्य प्रदेश में 12 नवंबर को एक राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव है। बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को अपना उम्मीदवार बनाया है। उनके खिलाफ एमपी के बैतूल के एक अतिथि शिक्षक चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।भोपाल: मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव में बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है। उनके साथ बीजेपी के 164 विधायकों का समर्थन है। दूसरी तरफ बैतूल का एक अतिथि शिक्षक है, जो भोपाल में डेरा डाले हुए हैं। वह राज्यसभा उपचुनाव के लिए 10 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर ढूंढ रहे हैं। इसके लिए अलग-अलग पार्टियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं।
निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए खरीदा फॉर्म
55 वर्षीय हरिप्लाल बिहारे अकेले ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने 12 नवंबर को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री और बीजेपी उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए नामांकन फॉर्म लिया है। हालांकि गेस्ट टीचर के लिए मुकाबला अभी शुरू नहीं हुआ है, इसमें शामिल होने की कोशिशें अभी वह कर रहे हैं।सियासी दलों के नेताओं से कर रहे गुजारिश
पिछले दो दिनों से, बिहारे राज्य की राजधानी भोपाल में सत्ता के गलियारों के चक्कर काट रहे हैं। उनके हाथ में एक फाइल है और गुजारिश है कि क्या आप मेरा नाम प्रस्तावित करेंगे। उन्होंने बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों के नेताओं से संपर्क किया है। उन्हें उम्मीद है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद चुनाव मैदान में उतरने की इच्छा रखने वाले एक नागरिक के प्रति नेता थोड़ी उदारता दिखाएंगे।
बीजेपी नेताओं से भी है उम्मीद
मध्य प्रदेश में उन्हें बीजेपी नेताओं से भी उम्मीद है, जिनकी पार्टी ने हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है। हरिप्लाल बिहारे को लगता है कि बीजेपी नेता भी उनकी बातों के समझेंगेबाहर के लोगों को भेज रहे हैं राज्यसभा
बिहारे का तर्क है कि मैं इस बात से नाखुश हूं कि राजनीतिक पार्टियां राज्यसभा के लिए राज्य के बाहर के लोगों को उम्मीदवार बनाती हैं। वे साबित करना चाहते हैं कि एक आम नागरिक, जिसके पास न तो किसी पार्टी का झंडा है और न ही बहुत पैसा, वह भी चुनाव लड़ने और जीतने का सपना देख सकता है।
एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट
यह सीट केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। उन्होंने 13 अक्टूबर को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 में खत्म होने वाला था। हालांकि एमपी में बीजेपी विधायकों की संख्या देखें तो किसी भी चुनौती देने वाले की जीत नामुमकिन दिखती है।










































