पंच,उपसरपंच ने खोला मोर्चा कहां ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचों के पति कर रहे हैं अपनी मनमानी

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जिले के पंच,उपसरपंच द्वारा जनशक्ति उपसरपंच एवं पंच कल्याण महासंघ का गठन कर जनसुनवाई में जिले के लगभग आधा सैकड़ा पंच और उपसरपंच के द्वारा कलेक्टर महोदय को आवेदन दिया गया है जिसमें उनके द्वारा यह मांग की गई है कि आज ग्राम पंचायतों में जो सरपंच महिलाएं चुनकर आई है उनके पति उनका पूरा काम कर रहे हैं एवं पंच ,उपसरपंचों की कोई भी सुनवाई आज ग्राम पंचायतों में नहीं हो रही है जिस पर उन्होंने एक संघ बनाकर प्रशासन से यह मांग की गई है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह आंदोलन के लिए बाध्य होंगे

जिस प्रकार से जिले की पंचायतों में महिला सरपंच चुनकर आई है एवं जिन पंचायतों में ऐसे सरपंच प्रतिनिधि बने हैं जिन्हें विभाग की अधिक जानकारी नहीं है उनके स्थानों पर आज या तो उनके परिवार के सदस्य काम कर रहे हैं या तो फिर महिला सरपंचों के पति उनका स्थान लेकर ग्राम पंचायतें चला रहे हैं जबकि बीते दिनों पूर्व शासन द्वारा एक आदेश पारित किया गया था कि जिन भी ग्राम पंचायतों में जो भी सरपंच उपसरपंच एवं पंच सहित जो भी जनप्रतिनिधि पंचायतों ,नगर पालिकाओं,जनपद पंचायत, जिला पंचायत में जो जनप्रतिनिधि बने हैं वहां ही ग्राम पंचायत की बैठक एवं प्रशासनिक बैठकों में जो जनप्रतिनिधि बने है वही उपस्थित होकर कार्य करेंगे उनके स्थान पर कोई भी उनके परिवार का या उनके पति काम नहीं करेंगे किंतु वर्तमान समय की बात करें तो जिले में अधिकतर जनप्रतिनिधि बना है चाहे वह ग्रामीण क्षेत्रों में हो या फिर शहरों में क्यों ना हो उनके स्थानों पर आज या तो उनके पति काम कर रहे हैं या तो फिर उनके परिवार के सदस्य द्वारा कार्य किया जा रहा है जिसको लेकर के 13 जून को जिले के पंच उप सरपंचों द्वारा एक ज्ञापन कलेक्टर महोदय को दिया गया है जिसमें उनके द्वारा यह बताया गया है कि आज अधिकतर ग्राम पंचायतों में महिला सरपंच होने की वजह से उनके पति या उनके रिश्तेदार के द्वारा काम करवाया जा रहा है एवं जब वह अपनी समस्या लेकर जाते हैं या फिर कोई बात रखते हैं तो उनके पति या रिश्तेदारों के द्वारा उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता है और उनकी सुनवाई नहीं हो रही है जिसकी वजह से वह यह मांग कर रहे हैं कि जो सरपंच बना है वही ग्राम पंचायतों एवं अन्य क्षेत्रों में हस्तक्षेप करें उनके परिवार के सदस्यों को ग्राम पंचायतों से दूर रखा जाए जबकि देखने को यह मिल रहा है कि कोई भी काम करवाना हो या कहना हो तो सरपंच को छोड़कर उनके पति या उनके रिश्तेदारों से पहले हामी भरवानी होती है जो कि गलत है वह चाहते हैं कि जो सरपंच प्रतिनिधि बना है वही यह सब काम करें तो ठीक होगा नहीं तो आगामी समय में उनके द्वारा आंदोलन किया जाएग

सरपंच पतियों द्वारा पंचायतो में दादागिरी की जा रही हैं सरपंच की कुर्सी में स्वयं, उपसरपंच की कुर्सियां पर अपने रिश्तेदारों को बिठा रहे है- संतोष राहांगडाले

जनशक्ति संघ के प्रदेश अध्यक्ष संतोष राहांगडाले बताते हैं कि आज जिले के सभी पंच और उपसरपंच द्वारा जनशक्ति संघ के बैनर तले जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा जा रहा है जिसमें वह बताते हैं कि आज ग्राम पंचायतों में पंच और उप सरपंचों का अपमान किया जा रहा है उन्हें कोई मान सम्मान ग्राम पंचायतों में नहीं मिल रहा है और ग्राम पंचायत में सरपंच पतियों द्वारा अत्याचार किया जा रहा है वह अपनी दादागिरी कर रहे हैं और ग्राम पंचायतों में जो उपसरपंच की कुर्सियां हैं उन पर दूसरे लोगों को बिठाया जा रहा है और ग्राम पंचायतों में सरपंच पतियों एवं सचिवों के द्वारा अपनी मनमर्जी से ग्राम पंचायत चलाई जा रही है और फर्जी रूप से राशि निकालकर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है जबकि इसके पहले भी उनके द्वारा इन सब की समस्या कलेक्टर साहब के पास रखी गई है किंतु आज तक उनकी समस्या पर प्रशासन के द्वारा ध्यान नहीं दिया गया है वही कभी भी सरपंचों की शिकायत करो तो बड़ी पहुंच के चलते उन पर प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जाती ऐसे बहुत से सरपंच हैं जिनके द्वारा प्रशासनिक दबाव में आकर कार्यवाही को रोक दिया जाता है वही वह कहते हैं कि ऐसा ही चलता रहा तो वह आंदोलन के साथ-साथ भूख हड़ताल भी करेंगे क्योंकि वह बताते हैं कि जब भी किसी सरपंच की शिकायत करो तो पार्टी स्तर पर उनके नेताओं का दबाव होने की वजह से उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती और उनके बड़े नेता भी उनका साथ देते हैं और जब यह सब होता है तो सरपंच पति द्वारा कहा जाता है कि आप हमारा कुछ नहीं कर सकते हमारी पहुंच ऊपर तक है यह सब से आज हमारा मनोबल गिर रहा है वही जो शासन द्वारा आदेश निकाला गया था कि जो जनप्रतिनिधि है वही प्रशासनिक बैठकों एवं स्वभाव में रहेगा उस नियम का जिले में कोई भी पालन नहीं कर रहा है उस नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही है

सरपंच से कितने ही बार बात कर ले ,वह भी यही कहते हैं कि एक बार अपने भाई साहब से बात कर लीजिए- संतोष उयके

कटंगझरी के उपसरपंच संतोष उयके बताते हैं कि उनके ग्राम पंचायत में सरपंच पति द्वारा पंचउपसरपंच की बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है और जब भी हम अपने वार्ड या ग्राम की कोई समस्या लेकर जाते हैं तो सरपंच पति द्वारा उन पर ध्यान ना देकर अपनी इच्छा मुताबिक कार्य किया जाता है ग्राम पंचायत जाते हैं तो उनकी कुर्सियों पर सरपंच पति द्वारा अपने परिचितों को बिठा दिया जाता है और जब उनके द्वारा इन सब चीजों का विरोध किया जाता है तो सरपंच पति द्वारा कह दिया जाता है कि आप हमारा क्या कर सकते हैं और आपको जो करना है आप स्वतंत्र हैं और वह ,वही करेंगे जो उनके मन में आएगा और ग्राम पंचायतों में उनकी कोई सुनवाई नहीं होती और सरपंच पति द्वारा अपनी मनमानी की जाती है जब भी कोई काम करवाना या समस्या रहती है तो बिना सरपंच पति की हामी भरे या बात किए वह काम नहीं होता भले ही हम सरपंच से कितने ही बार बात कर ले वह भी यही कहते हैं कि एक बार अपने भाई साहब से बात कर लीजिए और उनका कहना है कि जब सरपंच कोई और है तो हम उनके पति से क्यों बात करें और उनके द्वारा सचिव को भी अपनी और कर लिया जाता है तो सचिव भी हमारी एक भी नहीं सुनता है

जब भी वह मीटिंग में जाते हैं तो उन्हें चाय पिलाकर घर भिजवा दिया जाता है- कंचनबाई

किरनापुर ब्लॉक की पानगाँव उपसरपंच कंचनबाई बताती है कि उन्हें उनकी ग्राम पंचायतों में कोई मान सम्मान नहीं मिल रहा है और जब भी वह मीटिंग में जाते हैं तो उन्हें चाय पिलाकर घर भिजवा दिया जाता है और जब भी कोई प्रस्ताव बनाया जाता है तो उनसे बिना पूछे बनाया जाता है और साइन लेकर घर भिजवा दिया जाता है जबकि उनसे कोई सलाह मशवरा नहीं किया जाता सरपंच द्वारा कुछ पंच और सचिव को अपनी ओर करके अपनी मनमर्जी से कार्य किया जा रहा है और उनसे सरपंच कोई भी विषय को लेकर चर्चा नहीं करते हैं और ज्यादा विरोध करो तो झगड़ा लड़ाई की जाती है और पंचायत में क्या हो रहा है नहीं हो रहा है इसकी कोई जानकारी उन्हें नहीं दी जाती वही वह यह मांग करते हैं कि उनके द्वारा जो मांग रखी जाती है उन पर सुनवाई होनी चाहिए

जनपद सीईओ द्वारा धारा 40 की कार्यवाही लिख दी गई थी पर आज तक सरपंच पर कोई कार्यवाही नहीं हुई- सुरेंद्र गौतम

ग्राम पंचायत सिंगाई के पंच सुरेंद्र गौतम बताते हैं कि वह परसवाड़ा क्षेत्र के रहने वाले हैं उनके पंचायत में बहुत अधिक अनियमितताएं हैं उसकी शिकायत उनके द्वारा अपने क्षेत्र के संबंधित अधिकारी को की गई जिस पर जांच की गई और जांच में यह पाया गया कि सरपंच सचिव द्वारा अनियमितता की गई है किंतु आज तक उन पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है जबकि प्रशासन द्वारा जांच किया गया था तो उसमें यह सिद्ध हो गया कि सरपंच सचिव द्वारा अनियमितता की गई है किंतु उन पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई जबकि जनपद सीईओ द्वारा धारा 40 की कार्यवाही लिख दी गई थी पर आज तक सरपंच सचिव पर कोई कार्यवाही नहीं हुई

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