वारासिवनी लालबर्रा मार्ग स्थित सिद्ध प्राचीन रामदेव बाबा मंदिर परिसर में 25 दिसंबर से आठ दिवसीय रामलीला कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश से पधारे रामायण प्रचार समिति के द्वारा नाट्य मंचन किया जा रहा है। जिसके माध्यम से प्रतिदिन शाम 7:30 से 10 बजे तक रामचरित्र मानस अंतर्गत भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी का चरित्र वर्णन जीवंत झांकियां के माध्यम से नाट्य मंचन कर किया जा रहा है। जिसमें भगवान श्री राम सहित रामचरित्र मानस के समस्त पत्रों का अभिनय कर बताया जा रहा है कि किस प्रकार परिवार में आदर्श माता-पिता का आदर पिता पुत्र गुरु भाई का प्रेम कर्तव्य क्या होते हैं किस प्रकार से इनका सम्मान और उनके बीच कैसा रिश्ता होना चाहिए बताया जा रहा है। इसी कड़ी में 28 दिसंबर को भगवान श्रीराम माता सीता विवाह एवं भगवान परशुराम भगवान लक्ष्मण संवाद के बारे में बताया गया कि राजा जनक अपने राज में अपनी बेटी माता सीता का स्वयंवर आयोजित करते हैं जिसमें भगवान शिव के धनुष को उठाने की शर्त रहती है जिसमें अनेक बलशाली राजा धनुष की प्रत्यंचा नहीं चढ़ा पाते हैं। तभी महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम को शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने की आज्ञा दी। उनकी आज्ञा का पालन करते हुए भगवान राम शिव जी के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने लगे और धनुष टूट गया। तब राजा जनक ने श्री राम जी से सीता का विवाह करा दिया। इस प्रकार माता सीता और भगवान राम का विवाह हो गया। वही धनुष की प्रत्यंचा चढ़ते समय धनुष टूट जाने से भगवान परशुराम क्रोधित हो जाते हैं इस बीच जो भगवान परशुराम और भगवान लक्ष्मण के बीच जो संवाद होता है उसे विस्तार पूर्वक जीवंत झांकियां के माध्यम से नाट्य मंचन कर दर्शाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नगर वासी मौजूद रहे।









































