भारत ने मानवाधिकार परिषद के सदस्य के तौर पर अपने रचनात्मक जुड़ाव का उल्लेख किया। साथ ही, भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय यानी OHCHR पर चयनात्मक रवैये और दोहरे मानकों का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे बहुपक्षीय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है।United Nations: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की 81वीं बैठक की थर्ड कमेटी में भारत ने पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए हैं। मानवाधिकार मामलों के हाई कमिश्नर के साथ इंटरैक्टिव संवाद के दौरान भारत की ओर से फर्स्ट सेक्रेटरी अनुज स्वरूप ने देश का बयान पेश किया। UNGA की थर्ड कमेटी में अनुज स्वरूप ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई, हिरासत और इंटरनेट पाबंदियों का मुद्दा उठाया
भारत ने दोहरे मानक अपनाने का लगाया आरोप
भारत ने मानवाधिकार परिषद के सदस्य के तौर पर अपने रचनात्मक जुड़ाव का उल्लेख किया। साथ ही, भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय यानी OHCHR पर चयनात्मक रवैये और दोहरे मानकों का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे बहुपक्षीय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होता है।
पाकिस्तान पर एक रिपोर्ट तैयार करने की मांग
भारत ने OHCHR से पाकिस्तान पर एक रिपोर्ट तैयार करने की मांग की। इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान हुई कथित हत्याओं की निष्पक्ष जांच, हिरासत में रखे गए अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं को उचित कानूनी प्रक्रिया उपलब्ध कराने और पूरे PoJK में इंटरनेट पहुंच पर लगी पाबंदियां हटाने जैसे मुद्दे शामिल करने को कहा गया। भारत ने पाकिस्तान से यह भी विचार करने का आग्रह किया कि देश के बड़े हिस्सों में, खासकर भारत के कब्जे वाले बताए गए क्षेत्रों में, मानवाधिकारों की स्थिति कैसी है।मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट’ विषय पर भारत का पक्ष रखा
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार निकायों से ‘राजनीतिकरण’से बचने तथा सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संदर्भों का सम्मान करने का आग्रह करते हुए कहा है कि देश कोई भेदभाव किए बिना और दोहरा मापदंड अपनाए बिना सभी के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति के 81वें सत्र में ‘मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट’ विषय पर भारत का पक्ष रखा। स्वरूप ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त और उनके कार्यालय के साथ विश्वास एवं साझेदारी की भावना से काम करना जारी रखेगा। उन्होंने कहा, ‘हम बिना किसी भेदभाव और दोहरे मापदंड के सभी के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’
UN से संदर्भों का सम्मान करने की अपील
स्वरूप ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार निकाय राजनीतिकरण और पक्षपात से ऊपर उठकर सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संदर्भों का सम्मान करेंगे ताकि वे दुनिया को निष्पक्ष रूप से नैतिक मार्गदर्शन देते रहें।’ भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कुछ दिन पहले उसने राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की टिप्पणियों को ‘अनावश्यक’और देश के आंतरिक मामलों में ‘अस्वीकार्य हस्तक्षेप’ करार दिया था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने पिछले सप्ताह ‘दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान प्रदर्शनकारियों, प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को बड़ी संख्या में हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताई थी।’










































