Dia Mirza on Tumsa Nahin Dekha: बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस दीया मिर्जा (Dia Mirza) इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में बनी हुई है। कभी दीया मिर्जा का कोई बयान वायरल हो जाता है, तो कभी एक्ट्रेस के किसी लुक पर सोशल मीडिया पर हलचल मच जाती है। इन सब के बीच दीया मिर्जा ने Zoom को इंटरव्यू दिया है। बातचीत के दौरान उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर को याद किया और बताया कि एक फिल्म के गाने की शूटिंग ने उन्हें खुद को समझने में काफी मदद की। इसके अलावा दीया मिर्जा ये भी बताया कि उन्होंने 20 साल तक फिल्म के सेट पर शीशा क्यों नहीं देखा।एक गाने ने बदल दी लाइफ
दीया मिर्जा ने अपनी फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ (Tumsa Nahin Dekha) के एक गाने का जिक्र करते हुए किया। इस फिल्म में उनके साथ इमरान हाशमी (Emraan Hashmi) लीड रोल में नजर आए थे। दीया मिर्जा ने Zoom से बात करते हुए कहा कि ‘तुमसा नहीं देखा’ में काम करते हुए उन्होंने अपने शरीर को लेकर सुरक्षित, सहज और मजबूत महसूस करना सीखा। उन्होंने कहा कि कपड़े कम होने के बावजूद उन्हें दूसरों की नजरों से असहज महसूस नहीं हुआ। दीया ने उस गाने का उदाहरण दिया, जिसमें उन्हें कपड़े उतारने थे। उन्होंने बताया, ‘भट्ट साहब सेट पर काफी रहते थे, क्योंकि वो इस पर काम भी कर रहे थे। मुझे उस फिल्म में काम करना बहुत अच्छा लगा। मुझे याद है कि एक गाना था, जिसे वैभवी मर्चेंट ने हमारे साथ शूट किया था और मैंने निर्माताओं से सिर्फ यही कहा था। ये ऐसा गाना था जिसमें मुझे कपड़े उतारने थे और आखिर में मुझे सिर्फ इनरवियर में रहना था। मुझे सहज महसूस करना जरूरी था।’ दीया ने आगे बताया, ‘हमारे आसपास 500 लोगों की भीड़ थी, जो सभी पुरुष थे और 200 लोगों की टीम थी, जिसमें ज्यादातर पुरुष थे। और मुझे इस गाने में जो मिला, वो शायद ही मुझे अपनी किसी और फिल्म के जरिए मिला होगा। मुझे समझ आया कि मैं पुरुषों की नजरों से पूरी तरह प्रभावित हुए बिना एनर्जी और अपनी खूबसूरती को महसूस और सेलिब्रेट कर सकती हूं और उस नजरिए से खुद को छोटा महसूस करने की जरूरत नहीं है।’दिया मिर्जा ने ‘मैन-हेटर’ कहे जाने पर कही ये बात
दीया मिर्जा ने ‘मैन-हेटर’ कहे जाने पर भी अपनी बात रखी। जूम के साथ खास बातचीत में उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग आपकी कही हुई बातों का इस्तेमाल हमेशा आपको गलत साबित करने के लिए करते हैं, क्योंकि वह उनकी सोच के हिसाब से नहीं होती। सिर्फ शायद सरकार के किसी स्तर पर और वे इंडस्ट्री जो इस संकट को बढ़ा रही हैं और इसे और गहरा कर रही हैं। जब कोई कहता है कि पैट्रियार्की जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वो पुरुषों से नफरत करता है। क्योंकि इसे इस तरह पेश किया गया कि वो पुरुषों से नफरत करती हैं और उनके हिसाब से सभी पुरुष जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि ‘ये बिल्कुल गलत है, क्योंकि मैं जो कह रही थी वो ये था कि पैट्रियार्की क्या है? पैट्रियार्की बराबरी की किसी भी कीमत को नहीं समझती। ये चीजों को संभालती नहीं है। ये संसाधनों की अहमियत को उस तरह नहीं समझती कि हमें उनकी रक्षा करनी है, उनकी कद्र करनी है और उन्हें संभालकर रखना है। इसका तरीका चीजों का इस्तेमाल करने वाला, ज्यादा लेने वाला और नुकसान पहुंचाने वाला है। वहीं, मातृसत्तात्मक सोच देखभाल, बराबरी, समझ और प्यार के साथ काम करती है। ऐसी सोच में नुकसान और बर्बादी सामान्य नहीं लगती।’










































