क्या आप भी विदेश भेजते हैं पैसे? जान लें इनकम टैक्स की रडार पर क्यों हैं ये लोग

0

विदेशों में पैसे भेजने (Foreign Remittance) वालों पर इनकम टैक्स विभाग ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है। जानिए कौन से लोग टैक्स विभाग के रडार पर आ गए हैं और LRS नियमों के तहत टैक्स नोटिस से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।आजकल बच्चों की विदेश में पढ़ाई, मेडिकल इलाज, पर्यटन या विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों को आर्थिक सहायता देने के लिए विदेशों में पैसे भेजना एक सामान्य बात हो गई है। हालांकि, अगर आप भी नियमित रूप से या बड़ी राशि विदेशों में ट्रांसफर (Foreign Remittance) करते हैं, तो अब आपको बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है। इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) ने विदेशों में भेजे जा रहे पैसों और टैक्सपेयर्स द्वारा दाखिल किए जाने वाले इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) के आंकड़ों में बड़े पैमाने पर विसंगतियां पाई हैं, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोगों को टैक्स नोटिस भेजे जा रहे हैं।

इनकम टैक्स विभाग की रडार पर क्यों हैं ये लोग?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत कोई भी भारतीय नागरिक एक वित्तीय वर्ष में 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹2 करोड़ से अधिक) तक की राशि बिना किसी विशेष अनुमति के विदेश भेज सकता है। हालांकि, सरकार ने इस सुविधा के साथ-साथ टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) के कड़े नियम लागू किए हैं। टैक्स विभाग के संज्ञान में आया है कि कई लोग अपनी घोषित सालाना आय (Declared Income) की तुलना में कहीं अधिक राशि विदेशों में भेज रहे हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति की घोषित आय ₹10 लाख है, लेकिन वह विदेशों में ₹20 लाख या उससे अधिक भेज रहा है, तो ऐसी वित्तीय गतिविधियां तुरंत टैक्स अधिकारियों के रडार पर आ जाती हैं।

आयकर विभाग अब एआई (Artificial Intelligence) और डेटा एनालिटिक्स के जरिए बैंकों, फॉरेक्स डीलरों और वित्तीय संस्थानों से मिलने वाले डेटा का मिलान सीधे टैक्सपेयर्स के आईटीआर से कर रहा है। जिन मामलों में घोषित आय और विदेश भेजे गए फंड के बीच बड़ा अंतर मिलता है, वहां विभाग संबंधित व्यक्ति से आय के स्रोतों का ब्योरा मांग रहा है। अगर आप विदेश में भेजे गए फंड का सही स्रोत बताने में असमर्थ रहते हैं, तो उस राशि को अघोषित आय (Undisclosed Income) माना जा सकता है, जिस पर भारी जुर्माना और ब्याज लगाया जा सकता है।इन बातों का रखें ध्यान

इसके अलावा, विदेश पैसे भेजते समय TCS दरों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। शिक्षा और मेडिकल जरूरतों को छोड़कर अन्य सभी उद्देश्यों (जैसे विदेश यात्रा, निवेश या उपहार) के लिए ₹7 लाख से अधिक की राशि पर 20 प्रतिशत तक का टीसीएस (TCS) लागू होता है। यद्यपि आप आईटीआर फाइल करते समय इस टीसीएस का रिफंड क्लेम कर सकते हैं या अपनी टैक्स लायबिलिटी में एडजस्ट कर सकते हैं, लेकिन अगर आपने अपने आईटीआर में विदेशी संपत्तियों (Foreign Assets) या विदेशी खातों का सही ब्योरा नहीं दिया है, तो ब्लैक मनी एक्ट के तहत भी सख्त कार्रवाई हो सकती है।

अगर आप भविष्य में आयकर विभाग के नोटिस या कानूनी झंझटों से बचना चाहते हैं, तो हमेशा वैध बैंकिंग चैनलों के जरिए ही विदेश पैसा भेजें। पैसे का स्रोत (Source of Income) पूरी तरह से पारदर्शी होना चाहिए और आपके बैंक स्टेटमेंट्स में दर्ज होना चाहिए। साथ ही, अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय सभी रेमिटेंस और टीसीएस का सही ब्योरा दें। अगर आपने अपने किसी रिश्तेदार के जरिए विदेश पैसा भिजवाया है, तो उसका भी लिखित रिकॉर्ड और गिफ्ट डीड जैसी औपचारिकताएं पूरी रखें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here