अमेरिका, चीन, रूस… सब पड़े हैं ईरान के यूरेनियम के पीछे, कीमत इतनी कि 360 डिग्री बदल जाएगी अर्थव्यवस्था

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नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। वहीं इस युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका ने ईरान के सामने एक ऐसी शर्त रख दी है, जिसे ईरान पूरा नहीं करना चाहेगा। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना यूरेनियम उसे सौंप दे। ईरान के यूरेनियम पर सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि चीन और रूस की भी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के पास 440 किलो 60% संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) है। वहीं ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी यह ‘रणनीतिक संपत्ति’ किसी को नहीं सौंपेगा। ईरान के पास उच्च संवर्धित यूरेनियम की मात्रा इतनी है कि उससे 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। साथ ही कीमत इतनी कि कई देशों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी।क्या है यूरेनियम और इतना जरूरी क्यों?

यूरेनियम (Uranium) भारी रासायनिक तत्व है। यह एक चांदी जैसी सफेद धातु है। यह सोने से थोड़ा कम लेकिन सीसे (Lead) से लगभग 70% अधिक भारी होता है। यह प्राकृतिक रूप से रेडियोधर्मी (Radioactive) होता है, जिसका अर्थ है कि इसके परमाणु धीरे-धीरे टूटते रहते हैं और ऊर्जा छोड़ते हैं।

वहीं U-235 केवल 0.7% होता है। यही वह हिस्सा है जो बिजली बनाने या विस्फोट के काम आता है।

यूरेनियम की सबसे बड़ी खासियत इसकी विखंडन क्षमता (Fissionability) है।

जब यूरेनियम-235 के नाभिक पर न्यूट्रॉन की बौछार की जाती है, तो वह दो हिस्सों में टूट जाता है और भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त करता है।

इसी ऊर्जा का इस्तेमाल परमाणु रिएक्टरों में बिजली बनाने के लिए किया जाता है।

यूरेनियम के इसी गुण के कारण इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी होता है।

प्राकृतिक यूरेनियम मुख्य रूप से दो आइसोटोप्स (U-238 और U-235) का मिश्रण होता है।

U-238 लगभग 99.3% मात्रा में पाया जाता है, लेकिन यह आसानी से विखंडित नहीं होता।

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