आदिवासी अंचलों में नहीं थम रहा मासूम बच्चों की मौत का सिलसिला

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फिर हुई एक और चार वर्षीय मासूम बच्चे की मौत
मौत के बाद फूटा आदिवासी समाज का आक्रोश, बंजारी तिराहे पर चक्काजाम
आदिवासी बच्चों की लगातार मौतों पर भड़का गुस्सा, स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही के आरोप
पोस्टमार्टम से पहले अंतिम संस्कार कराने के प्रयास का भी लगाया आरोप
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पदमेश न्यूज़।बालाघाट। जिले में आदिवासी बच्चों की लगातार हो रही मौतों को लेकर आदिवासी समाज का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बुधवार तड़के मोहनपुर पंचायत के बैगाटोला में 4 वर्षीय मासूम लवकुश की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।नाराज आदिवासी समाज के लोगों ने बालाघाट-बैहर मार्ग पर बंजारी तिराहे के पास चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने बच्चों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।हालांकि मामले को लेकर फिलहाल संबंधित अधिकारियों के बयान सामने नहीं आए हैं और ना ही इस मामले को लेकर उनसे संपर्क हो सका है। अधिकारी गण फोन उठाने में भी परहेज कर रहे हैं।जिससे आरोपो की स्थिति फिलहाल साफ नही हो पाई है।फिलहाल 4 वर्षीय लवकुश की मौत के बाद हुए चक्काजाम ने एक बार फिर जिले के आदिवासी अंचलों में बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं और लगातार हो रही मौतों के मामले को गंभीर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आदिवासी समाज ने स्पष्ट किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था में ठोस सुधार किए जाएं।

मौत की खबर मिलते ही फूटा जन आक्रोश
उधर मासूम बच्चे की मौत की खबर फैलते ही क्षेत्र में नाराजगी और बढ़ गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिले के आदिवासी अंचलों में लगातार बच्चों की मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को लेकर अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। समाज के लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने की मांग की।

पोस्टमार्टम से पहले अंतिम संस्कार कराने के प्रयास?
उधर प्रदर्शनकारियों और परिजनों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि 4 वर्षीय लवकुश का पोस्टमार्टम कराए बिना ही जबरन अंतिम संस्कार कराने का प्रयास किया गया। इस आरोप को लेकर आदिवासी समाज के लोगों में भारी नाराजगी देखी गई।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लगातार बच्चों की मौत के मामलों को देखते हुए प्रत्येक घटना की गंभीरता से जांच होना आवश्यक है। उनका आरोप है कि यदि पोस्टमार्टम और अन्य आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी किए बिना अंतिम संस्कार कराया जाता है तो मौत के वास्तविक कारणों की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।

हैदराबाद में रोजगार की तलाश में हैं माता-पिता
स्थानीय लोगो से मिली जानकारी के अनुसार मृतक बच्चे के माता-पिता रोजगार की तलाश में हैदराबाद गए हुए हैं। परिजनों और रिश्तेदारों का आरोप है कि माता-पिता को अपने बच्चे की अंतिम विदाई और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शामिल होने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इस बात को लेकर भी समाज के लोगों में नाराजगी है।आदिवासी समाज के लोगों का कहना है कि माता-पिता के पहुंचने से पहले अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए थी। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
लगातार बच्चों की मौत के मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में बच्चों को समय पर और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। समाज के लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने तथा जरूरत पड़ने पर गंभीर बच्चों को तत्काल बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की मांग की।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बच्चों की लगातार हो रही मौतों को सामान्य घटनाओं के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। इसके पीछे स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, समय पर उपचार न मिलना अथवा अन्य किसी कारण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।

बालाघाट-बैहर मार्ग पर प्रभावित हुआ यातायात
आदिवासी समाज द्वारा किए गए चक्काजाम के कारण बालाघाट-बैहर मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित होने की सूचना है। मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बाधित होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी मौके पर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने और अपनी मांगों पर ठो…

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