बांग्लादेश ने पहली बार आधिकारिक रूप से चीन के 4.5-जनरेशन J-10CE लड़ाकू विमान खरीदने की लंबे समय से चर्चा में चल रही डील की पुष्टि कर दी है।
बांग्लादेश ने पहली बार आधिकारिक रूप से चीन के 4.5-जनरेशन J-10CE मल्टीरोल लड़ाकू विमानों को खरीदने के बहुचर्चित सौदे की पुष्टि कर दी है। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के सूचना और प्रसारण सलाहकार जाहेद उर रहमान ने पुष्टि की कि इस ड्राफ्ट प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय और सशस्त्र बल प्रभाग (AFD) को भेज दिया गया है। यह जानकारी बांग्लादेश के प्रेस सूचना विभाग (PID) की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से सार्वजनिक की गई।
$2.3 अरब का रक्षा सौदा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश वायुसेना के पुराने बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए ढाका 20 J-10CE विमानों की खरीद पर लगभग 2.3 अरब डॉलर खर्च करने जा रहा है।बेस प्राइस $6.27 करोड़ है, लेकिन प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को जोड़कर यह कीमत प्रति विमान लगभग $11.5 करोड़ बैठती है। इस ड्राफ्ट प्रस्ताव में J-10CE के अलावा चीनी अटैक हेलीकॉप्टर, VIP ट्रांसपोर्ट हेलीकॉप्टर और यूएवी (UAV/ड्रोन) सिस्टम की खरीद भी शामिल है। यदि मौजूदा वित्त वर्ष (जुलाई से जून) में आवश्यक बजट स्वीकृत होता है, तो यह खरीद तुरंत पूरी की जाएगी, अन्यथा इसे अगले बजट चक्र में स्थानांतरित किया जाएगा।
पश्चिमी फाइटर्स की तुलना में किफायती
जाहेद उर रहमान ने कहा कि वास्तविक युद्ध स्थितियों में इस विमान के प्रदर्शन को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राफेल या यूरोफाइटर टाइफून जैसे यूरोपीय विमानों की तुलना में चीनी J-10CE की कीमत काफी कम है, जबकि क्षमता के मामले में यह बराबरी का मुकाबला करता है।
चीनी सैन्य विश्लेषक फू छियानशाओ के अनुसार: J-10CE में बड़े एपर्चर वाला AESA रडार लगा है, जो लंबी दूरी तक कई लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक और एंगेज कर सकता है। इस पर रडार-अब्जॉर्बिंग मैटेरियल (RAM) की कोटिंग की गई है, जिससे यह सेमी-स्टील्थ फाइटर की श्रेणी में आता है।अमेरिकी F-16 और फ्रांसीसी राफेल जैसे मीडियम-वेट विमानों की श्रेणी में यह सबसे किफायती और आधुनिक विकल्प है।
चीन पर बढ़ती निर्भरता
पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश चीन से J-10CE फाइटर जेट खरीदने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा। बांग्लादेश की सेना पहले से ही चीन निर्मित F-7MG लड़ाकू विमानों, K-8 ट्रेनर एयरक्राफ्ट, टैंकों, युद्धपोतों और मिसाइल प्रणालियों का इस्तेमाल कर रही है।










































