हम अपने घरों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए महंगे पेंट, आलीशान फर्नीचर और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर लाखों रुपये खर्च कर देते हैं। लेकिन घर के भीतर दीवारों और सीलिंग के पीछे छिपे सबसे महत्वपूर्ण हिस्से, यानी बिजली की वायरिंग पर हमारा ध्यान तब तक नहीं जाता, जब तक कि कोई बड़ा फॉल्ट न हो जाए। क्या आप जानते हैं कि एक समय के बाद घर की यही बिजली की वायरिंग एक अदृश्य ‘टाइम बम’ में बदल जाती है? देश में गर्मियों के सीजन में लगने वाली भीषण आग और शॉर्ट सर्किट के मामलों में से करीब 70 से 80 प्रतिशत हादसों की वजह दीवारों के अंदर दौड़ रही बेहद पुरानी और कमजोर हो चुकी वायरिंग होती है। इसलिए, यह जानना बेहद जरूरी है कि घर की वायरिंग की उम्र कितनी होती है और इसे कब बदलना सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य हो जाता है।
कितनी होती है कॉपर वायरिंग की उम्र?
आमतौर पर बिजली और सेफ्टी एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी घर में लगी अच्छी क्वालिटी की कॉपर वायरिंग की औसतन उम्र 20 से 25 साल होती है। अगर आपके घर को बने या घर की आखिरी वायरिंग हुए 20 साल से ज्यादा का समय हो चुका है, तो समझ लीजिए कि वह अपनी मियाद पूरी कर चुकी है। समय के साथ तारों के ऊपर चढ़ा प्लास्टिक या पीवीसी (PVC) का सुरक्षा कवच लगातार बिजली के बहने और गर्मी के कारण कड़ा होकर चटकने या टूटने लगता है। जब यह इंसुलेशन हट जाता है, तो नंगे तार आपस में टकराने लगते हैं, जिससे भयंकर शॉर्ट सर्किट होता है और कुछ ही सेकंड में पूरे घर में आग फैल जाती है। इसके अलावा, दो-तीन दशक पहले जब वायरिंग की गई थी, तब घरों में एसी, गीजर, माइक्रोवेव, चिमनी और वाशिंग मशीन जैसे भारी लोड वाले उपकरणों का इस्तेमाल बेहद सीमित या न के बराबर था, जिसके कारण पुरानी वायरिंग आज के आधुनिक लोड को संभालने में पूरी तरह नाकाम साबित होती है।
कैसे चेक करें वायरिंग कमजोर तो नहीं हुई?
अगर आप जानना चाहते हैं कि आपके घर की वायरिंग कमजोर हो चुकी है या नहीं, तो इसके लिए आपको कुछ गंभीर संकेतों (Warning Signs) पर ध्यान देना होगा। अगर आपके घर में बार-बार बिजली के बोर्ड से कुछ जलने की बदबू आती है, स्विच को ऑन-ऑफ करते समय चिंगारी (Sparks) निकलती है, या फिर बिना किसी बड़े कारण के बार-बार मेन स्विच का एमसीबी (MCB) ट्रिप हो जाता है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। इसके अलावा, अगर घर में हाई-लोड उपकरण जैसे एसी या पानी की मोटर चालू करते ही कमरे की लाइटें मद्धम (Dim) या फ्लिकर होने लगती हैं, तो यह साफ इशारा है कि आपके घर के तार अब बूढ़े हो चुके हैं और वे लोड का दबाव नहीं झेल पा रहे हैं। कई बार दीवारों में सीलन (Dampness) आने से पुरानी वायरिंग में करंट उतर आता है, जिससे दीवारों को छूने पर हल्का झटका भी लग सकता है, जो बेहद जानलेवा साबित हो सकता है।क्या करें?
इस बड़े खतरे से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने का एकमात्र उपाय समय पर कदम उठाना है। हर 5 से 10 साल में किसी सर्टिफाइड इलेक्ट्रिशियन से अपने पूरे घर के लोड और वायरिंग का ‘सेफ्टी ऑडिट’ जरूर करवाएं। अगर वायरिंग 20 साल पुरानी हो चुकी है, तो पैचवर्क या केवल खराब हिस्से को ठीक कराने के बजाय पूरे घर की री-वायरिंग (Re-wiring) करवाएं। नई वायरिंग करवाते समय हमेशा आग प्रतिरोधी (FR – Flame Retardant) क्षमता वाले आईएसआई (ISI) मार्क के ब्रांडेड तारों का ही इस्तेमाल करें। साथ ही, घर में सही रेटिंग के एमसीबी (MCB) और आरसीसीबी (RCCB) जरूर लगवाएं, जो करंट लीक होने या शॉर्ट सर्किट होने पर पलक झपकते ही बिजली की सप्लाई को काट देते हैं। याद रखें, दीवारों के पीछे छिपा यह तार भले ही नजर न आता हो, लेकिन इसकी सेहत ही आपके पूरे परिवार की सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है।









































