डॉलर के मुकाबले रुपया कितने दिनों बाद होगा मजबूत? हो गई भविष्यवाणी, काम कर गई RBI की चाल

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नई दिल्ली: वैश्विक अस्थिरता में कमी और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से हाल में उठाए गए कदमों के कारण आने वाले समय में रुपये पर दबाव कम हो सकता है और इसमें रिकवरी देखने को मिल सकती है। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई। हालांकि फेडरल रिजर्व रुपये में आने वाली तेजी के बीच बाधा बन सकता है।

फाइनेंशियल फर्म एलारा सिक्योरिटीज की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही यानी सितंबर 2026 तक डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती देखने को मिल सकती है। इसकी वजह चालू खाते घाटे पर दबाव कम होना और प्रवाह का बढ़ना है, जिससे रुपया 93-95 की रेंज में रह सकता है।रिपोर्ट के मुताबिक, पॉलिसी में बदलाव से निकट अवधि में स्थिति को संभालने में मदद मिली। साथ ही, विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिर करने के उपायों, सरकारी बॉन्ड पर टैक्स में छूट और डेट-आधारित विदेशी मुद्रा निवेश को आकर्षित करने के लिए दिए गए प्रोत्साहन का भी इसमें योगदान रहा।

भारतीय बाजार में बढ़ा निवेश प्रवाह

  • रिपोर्ट के अनुसार 5 जून 2026 के ऐतिहासिक इनकम-टैक्स ऑर्डिनेंस (जिसने एफपीआई के लिए भारत की सरकारी प्रतिभूतियों निवेश को टैक्स-फ्री बना दिया) की वजह से भारतीय डेट मार्केट में निवेश का प्रवाह फिर से ठीक-ठाक स्तर पर आ गया है और यील्ड में भी कमी आई है।
  • आरबीआई की पॉलिसी के बाद से 10 ट्रेडिंग दिनों में एफएआर रूट से भारत के डेट मार्केट में एफपीआई का निवेश बढ़कर 1.7 बिलियन डॉलर हो गया है, जबकि पॉलिसी से पहले के 10 ट्रेडिंग दिनों में यह 229 मिलियन डॉलर था।
  • ग्लोबल ब्लूमबर्ग बॉन्ड इंडेक्स में भारत के संभावित शामिल होने को मिलाकर, भारत में कुल निवेश 80-85 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

अमेरिका की ओर से क्या चिंताएं?

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के एआई निवेश का केंद्र बने रहने के बीच वहां ब्याज दरें बढ़ने का दौर शुरू होने वाला है। इसलिए भारतीय इक्विटी में एफपीआई निवेश का आउटलुक निराशाजनक बना हुआ है। फर्म ने अनुमान लगाया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व सितंबर 2026, दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 में 25-25 आधार अंक की तीन बार ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

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