बांस उत्पादन के लिए प्रदेशभर में पहचान रखने वाले बालाघाट जिले में एक बार फिर किसानों को वन विभाग से परिवहन अनुमति (टीपी) नहीं मिलने का मामला सामने आया है। बिरसा विकासखंड के ग्राम एक्को निवासी एक किसान ने आरोप लगाया है कि वह पिछले तीन महीने से अपने खेत में तैयार बांस के परिवहन की अनुमति (ट्रांजिट पास-टीपी) के लिए वन विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक अनुमति जारी नहीं की गई। इसके कारण खेत में पड़ा हजारों की संख्या में बांस बारिश के कारण खराब होने लगा है और उन्हें लाखों रुपये के नुकसान की आशंका सताने लगी है।
किसान मदन सिंह ने बताया कि उनकी निजी भूमि पर तैयार बांस की फसल पूरी तरह कटाई के बाद परिवहन के लिए तैयार है। उन्होंने वन परिक्षेत्र अधिकारी दक्षिण उकवा सामान्य को आवेदन देकर राज्य एवं राज्य के बाहर परिवहन के लिए ट्रांजिट पास जारी करने का अनुरोध किया था। उनके खेत में कुल 5,329 नग बांस कटकर तैयार पड़े हैं, जिनमें अलग-अलग लंबाई के बांस शामिल हैं। उन्होंने बताया कि समय पर परिवहन नहीं होने के कारण लगातार हो रही बारिश से बांस की गुणवत्ता प्रभावित होने लगी है, जिससे बाजार में मिलने वाला मूल्य भी कम हो जाएगा। यदि शीघ्र अनुमति नहीं मिली तो पूरी फसल खराब होने का खतरा है। मदन सिंह का कहना है कि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कई बार उनके खेत का निरीक्षण किया, सत्यापन भी किया, लेकिन इसके बावजूद फाइल आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार नए निरीक्षण और नई प्रक्रिया का हवाला देकर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। इससे उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान के समर्थन में पहुंचे ग्रामीण डमरू सिंह धुर्वे और कैलाश नकपुरे ने भी वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर किसानों को बांस उत्पादन के लिए प्रोत्साहित कर रही है, विभिन्न योजनाओं के माध्यम से खेती बढ़ाने की बात कही जा रही है, लेकिन जब किसान तैयार फसल बेचने की स्थिति में आता है तो उसे परिवहन अनुमति के लिए महीनों तक विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में किसान बांस की खेती करने से ही पीछे हट जाएंगे। ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित अधिकारियों द्वारा तीन-तीन और चार-चार बार मौके पर जाकर सत्यापन किया जा चुका है। इसके बावजूद अनुमति जारी नहीं होना समझ से परे है। उनका कहना है कि विभागीय प्रक्रिया इतनी जटिल नहीं होनी चाहिए कि किसान अपनी उपज बेचने के लिए महीनों तक इंतजार करता रहे। गौरतलब है कि बालाघाट जिला प्रदेश के प्रमुख बांस उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में किसान निजी भूमि पर व्यावसायिक रूप से बांस की खेती करते हैं। शासन भी किसानों को बांस उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करता है, लेकिन यदि तैयार उपज के परिवहन में ही अनावश्यक देरी होगी तो इसका सीधा असर किसानों की आय और बांस उत्पादन को बढ़ावा देने की योजनाओं पर पड़ेगा।
आवेदन कुछ दिन पहले ही मेरे संज्ञान में आया है – रेशम सिंह
इस पूरे मामले में जब वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) रेशम सिंह धुर्वे से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित किसान का आवेदन कुछ दिन पहले ही उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने मामले की जांच और निरीक्षण के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित कर दिया है। डीएफओ ने कहा कि कई बार किसान केवल निचले स्तर के कार्यालयों में ही आवेदन देकर प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करते रहते हैं, जबकि यदि वे सीधे डिवीजन कार्यालय में आकर अपनी समस्या रखते हैं तो अनुमति प्रक्रिया तेजी से पूरी कराई जा सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों को अनावश्यक रूप से बार-बार सत्यापन कराने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। यदि सभी आवश्यक दस्तावेज पूर्ण हैं तो नियमानुसार परिवहन अनुमति जारी की जाएगी। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित मामले में शीघ्र कार्रवाई कर किसान को राहत देने का प्रयास किया जाएगा।










































