भीषण गर्मी में लालबर्रा तहसील कार्यालय प्यासा, नहीं है प्याऊ की सुविधा, भटक रहे ग्रामीण

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पद्मेश न्यूज। लालबर्रा। इन दिनों सूरज की तपिश और भीषण गर्मी से आम जनजीवन बेहाल है, पारा लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है। ऐसे दौर में जहां राहगीरों और आम जनता के लिए जगह-जगह ठंडे पानी के प्याऊ खोले जा रहे हैं। वहीं क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण लालबर्रा तहसील कार्यालय खुद प्यासा बैठा है। करोड़ों रूपये का राजस्व वसूलने वाले राजस्व विभाग के इस कार्यालय में दूर-दराज से आने वाले पक्षकारों और ग्रामीणों के लिए पीने के पानी तक की कोई व्यवस्था नहीं है। नतीजा यह है कि इस चिलचिलाती धूप में लोग पीने के पानी के लिए परेशान है। जिसका मुख्य कारण है कि तहसील कार्यालय परिसर के अंदर स्थित ठंडे पानी की मशीन खराब हो चुकी है जि से अब तक नही सुधारा गया है और न ही ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है। ऐसी स्थिति में दुर-दराज से तहसील कार्यालय में राजस्व सहित अन्य काम से आने वाले लोगों को इस चिलचिलाती धुप में पीने के पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। लेकिन जिम्मेदारों के द्वारा इस समस्या की ओर कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है। वहीं क्षेत्रीयजनों ने प्रशासन से खराब हो चुकी ठंडे पानी की मशीन को सुधारने या फिर प्याऊ की सुविधा कर ठंडे पानी की व्यवस्था करने की मांग की है ताकि गर्मी में लोगों को प्यास लगने पर वे अपने कंठ को तर कर सके।

७७ ग्राम पंचायतों का एकमात्र केंद्र, रोज पहुंच रहे सैकड़ों लोग

आपकों बता दे कि लालबर्रा तहसील के अंतर्गत कुल ७७ ग्राम पंचायतें आती हैं। इन सभी पंचायतों के ग्रामीण और किसान जमीन की खसरा-खतौनी, जाति-निवास प्रमाण पत्र, सीमांकन और आपसी विवादों जैसे विभिन्न राजस्व कार्यों के लिए प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में तहसील कार्यालय पहुंचते हैं। लेकिन इस भीषण गर्मी में दुर-दराज से आने वाले लोगों के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था नही की गई है। ऐसी स्थिति में सभी को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जबकि प्याऊ की व्यवस्था कर देना चाहिए था, लेकिन ऐसा भी नही किया गया है जिससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है। विडंबना देखिए कि जो राजस्व विभाग शासन के खजाने को भरने में सबसे आगे रहता है, वही विभाग अपने परिसर में एक प्याऊ की व्यवस्था करने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। तहसील कार्यालय में अधिवक्ताओं, पक्षकारों और ग्रामीणों के बैठने की व्यवस्था तो दूर, पीने के साफ पानी का एक मटका तक नजर नहीं आता। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि दूर-दराज के गांवों से बस या अन्य साधनों से सफर तय कर जब वे तहसील कार्यालय पहुंचते हैं, तो यहां आते-आते वे प्यास से बेहाल हो जाते हैं। कार्यालय परिसर में कदम रखते ही उन्हें ठंडे पानी की उम्मीद होती है, लेकिन यहां आकर उन्हें भारी निराशा हाथ लगती है। वहीं तहसील कार्यालय में किसी काम से पहुंचे ग्रामीणों और पक्षकारों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि तहसील परिसर में पानी की व्यवस्था न होने से उन्हें मजबूरन कार्यालय से बाहर जाकर निजी दुकानों से २० रूपये की पानी की बोतल या ठंडे पानी के पाउच खरीदने पड़ रहे हैं। कई बार तो बुजुर्ग ग्रामीण पानी की तलाश में परिसर के चक्कर काटते रहते है।

अधिवक्ताओं और पक्षकारों में आक्रोश

तहसील परिसर में नियमित रूप से बैठने वाले स्थानीय अधिवक्ताओं और सहित अन्य लोगों ने भी इस अव्यवस्था पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उनका कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में यही स्थिति बनती है। अधिकारी वातानुकूलित कमरों में बैठते हैं, इसलिए उन्हें बाहर लू और धूप में खड़े ग्रामीणों की प्यास का अहसास नहीं होता। शासन-प्रशासन को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) से मांग की है कि लालबर्रा तहसील कार्यालय में तत्काल प्रभाव से ठंडे पानी के प्याऊ की व्यवस्था करवाई जाये। ताकि ७७ ग्राम पंचायतों से आने वाले जरूरतमंद ग्रामीणों को इस भीषण गर्मी में कुछ राहत मिल सके।

तहसीलदार भूपेन्द्र अहिरवार से दूरभाष पर तहसील कार्यालय में खराब ठंडे पानी की मशीन को सुधारने एवं दुर-दराज से आने वाले लोगों के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था करने के संबंध में चर्चा करने का प्रयास किया गया किन्तु संपर्क नही हो पाया।

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