मानसून सत्र के बीच ओम बिरला ने की सभी पार्टियों से खास अपील, क्या कांग्रेस मानेगी लोकसभा अध्यक्ष का अनुरोध?

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Monsoon Session 2026: लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सभी दलों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में चर्चा होनी चाहिए और गतिरोध खत्म करने के लिए सभी दलों को मिलकर रास्ता निकालना चाहिए। बिरला ने आश्वासन दिया कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए दलों को पर्याप्त समय दिया जाएगाMonsoon Session 2026: लोकसभा में जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में सभी दलों के सदन के नेताओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि जनता की आवाज सदन में सुनाई देनी चाहिए और इसके लिए मिलकर रास्ता निकाला जाना चाहिए। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

ओम बिरला ने सभी पार्टियों से क्या की अपील?

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में लोकसभा अध्यक्ष ने सत्र के दौरान गतिरोध जारी रहने पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी दलों के नेताओं से अपील करते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए आपसी सहमति बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि गतिरोध तोड़ने के लिए सभी दल मिलकर रास्ता निकालें। सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष ने यह भी कहा कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए जितना समय मांगा जाएगा, उतना समय दिया जाएगा।

तकरार की भेंट चढ़ता मानसून सत्र

अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी पर चर्चा और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही मानसून सत्र की शुरुआत से ही बाधित बनी हुई हैलोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही में सदस्यों की प्रभावी भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि सदन में सार्थक और रचनात्मक विचार-विमर्श होना चाहिए और देश को इस चर्चा को सुनना चाहिए। उन्होंने सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से सदन की कार्यवाही सुचारु, व्यवस्थित और गरिमापूर्ण ढंग से संचालित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक और सार्थक चर्चा के लिए सदन का सुचारु संचालन आवश्यक है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनता के मुद्दों को सदन के गलियारों में इंतजार करते हुए नहीं छोड़ा जा सकता, इन मुद्दों की आवाज सदन में उठनी चाहिए, उन पर चर्चा होनी चाहिए और उनके समाधान तलाशे जाने चाहिए।

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