Hemant Soren Discharge Petition Dismissed: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को अदालत से बहुत बड़ा झटका लगा है। रांची स्थित विशेष PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत ने सीएम हेमंत सोरेन की ओर से दायर की गई डिस्चार्ज याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद अब सोरेन के खिलाफ मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।
यह पूरा मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज की गई शिकायत (ECIR/RNZO/25/2023) के संबंध में है, जिसमें मुख्यमंत्री पर अवैध रूप से भूमि अधिग्रहण करने और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं।
दोनों पक्षों के बीच हुई थी तीखी बहस
इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (PMLA) योगेश कुमार की अदालत में हुई। मामले को लेकर दोनों ही पक्षों की तरफ से अदालत में बेहद विस्तृत और तीखी दलीलें पेश की गई थीं:प्रवर्तन निदेशालय (ED) का पक्ष: ED की ओर से विशेष लोक अभियोजक जोहेब हुसैन ने अदालत में कड़ा रुख अपनाते हुए याचिका का विरोध किया और सोरेन के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया।
हेमंत सोरेन का पक्ष: मुख्यमंत्री सोरेन की ओर से देश की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत में दलीलें पेश करते हुए इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बताया था। बता दें कि अदालत में मामले की मौखिक बहस 2 मई 2026 को ही पूरी हो गई थी, जिसके बाद दोनों पक्षों ने 8 मई 2026 को अपने-अपने लिखित तर्क भी अदालत के समक्ष जमा कर दिए थे।
वहीं, अब सभी पक्षों की दलीलें सुनने, गवाहों के बयानों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद विशेष अदालत ने माना कि मुख्यमंत्री को इस स्तर पर बरी (डिस्चार्ज) नहीं किया जा सकता।










































