पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। मां और बेटी के रिश्ते को तार तार कर देने वाले एक अत्यंत गंभीर मामले में वारासिवनी न्यायालय ने एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश संजय राज ठाकुर की अदालत ने अपनी ही १९ वर्षीय बेटी पर अनैतिक कार्यों गलत काम के लिए दबाव बनाने वाली कलयुगी मां को दोषी करार देते हुए ७ वर्ष के सश्रम कारावास और १००० रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
यह हैं पूरा मामला
सहायक लोक अभियोजक संतोष लिल्हारे के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पीडि़ता के पिता स्व.लोकेश श्रोत्रिया की अचानक मौत हो गई थी। पिता के निधन के बाद परिजनों और रिश्तेदारों की समझाइश पर १९ वर्षीय बेटी अपनी मां प्रगति पति स्व.लोकेश श्रोत्रिया के साथ रहने के लिए तैयार हो गई। दोनों थाना तिरोड़ी क्षेत्र के अंतर्गत निवास कर रहे थे। मां के साथ रहने के दौरान बेटी ने देखा कि उसकी मां शराब पीने की आदी हो चुकी थी और घर में कई अनजान और संदिग्ध लोगों का आना जाना था। आरोप के मुताबिक मां अपनी ही बेटी पर घर आने वाले लोगों के साथ सोने और गलत काम करने का लगातार मानसिक व शारीरिक दबाव बनाती थी। इसी बीच आरोपी मां ने हरिनारायण नामक व्यक्ति से विवाह कर लिया। इसके बाद मां और हरिनारायण दोनों मिलकर लडक़ी पर अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त होने के लिए दबाव बनाने लगे।
इंदौर पहुंचकर बुआ को बताई आपबीती, दर्ज हुआ मामला
मां और सौतेले पिता के प्रताडऩा से तंग आकर पीडि़ता किसी तरह इंदौर स्थित अपनी बुआ के घर पहुंची और वहां पूरी आपबीती विस्तार से बताई। घटना की गंभीरता को देखते हुए बुआ ने तुरंत पीडि़ता को साथ ले जाकर इंदौर के लसूरिया थाने में शिकायत दर्ज कराई। यह घटना १ जनवरी २०२१ से १ सितंबर २०२१ के बीच घटित होती रही थी जिसके बाद १६ सितंबर २०२१ को इंदौर में मामला दर्ज किया गया। चंूकि मामला थाना तिरोड़ी क्षेत्र का था इसलिए इंदौर पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर मामला आगे की कार्रवाई के लिए थाना तिरोड़ी स्थानांतरित कर दिया। तिरोड़ी पुलिस ने मामले की विवेचना करते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा ३७२ एवं ५११ के तहत अपराध पंजीबद्ध किया और जांच पूरी कर अभियोग पत्र वारासिवनी न्यायालय में पेश किया।
न्यायालय ने दी सख्त सजा
मामला द्वितीय अपर सत्र न्यायालय में विचाराधीन था। अभियोजन पक्ष सहायक लोक अभियोजक संतोष लिल्हारे की ओर से अदालत के समक्ष ८ महत्वपूर्ण गवाहों साक्ष्यों के बयान दर्ज कराए गए और २२ दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत किए गए। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और मामले की गंभीरता को देखते हुए द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश संजय राज ठाकुर की अदालत ने २२ जुलाई को आरोपी मां प्रगति को धारा ३६६ क के तहत दोषी पाया। न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी प्रगति को ७ वर्ष के सश्रम कारावास तथा १००० रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार इस घिनौने अपराध में शामिल दूसरा आरोपी हरिनारायण विचारधीन अपराध के दौरान से फ रार हैं । न्यायालय के द्वारा उसे भी आरोपी बनाया गया है और पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही है।
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