ग्वालियर। जेल की चाहरदीवारी से भागने के लिए अब अपराधियों को दीवारें फांदने या सुरंग खोदने की जरूरत नहीं पड़ रही है। अपराधियों ने अब ‘कानून’ का ही सहारा लेना शुरू कर दिया है। सजायाफ्ता और खूंखार अपराधी अब पैरोल का कानूनी अधिकार हासिल कर जेल से बाहर आ रहे हैं और फिर लौटने के बजाय गायब (फरार) हो रहे हैं। ग्वालियर समेत भोपाल, इंदौर और प्रदेश के कई अन्य जिलों से लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां हत्या, दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदी पैरोल अवधि खत्म होने के बाद भी जेल वापस नहीं पहुंचे। इस नए ट्रेंड ने पुलिस और जेल प्रशासन की नींद उड़ा दी है।प्रदेश में ऐसे सबसे ज्यादा मामले ग्वालियर में सामने आ रहे हैं। पिछले एक साल के दौरान ही ग्वालियर केंद्रीय जेल से 12 अपराधी पैरोल हासिल करने के बाद लौटे ही नहीं। यह जेल प्रशासन पर भी सवालिया निशान है। जेल में इनका व्यवहार अच्छा रहता है, तभी इन्हें पैरोल मिलती है। या तो जेल प्रशासन की मिलीभगत है या फिर जेल प्रशासन इनके इरादों को भांपने में ही नाकाम साबित हो रहा है।










































