इंडिगो से सफर करना हो सकता है महंगा, बढ़ेंगे फ्लाइट टिकट के दाम? CEO ने कहा- नहीं बचा कोई चारा

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IndiGo Airfare Hike: ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण इंडिगो एयरलाइंस हवाई किराए बढ़ा सकती है। सितंबर तिमाही में 2,055 करोड़ रुपये के घाटे के बाद कंपनी अपनी उड़ानों के विस्तार को धीमा और टिकट महंगे कर सकती है।IndiGo Airfare Hike: अगर आप आने वाले दिनों या छुट्टियों के लिए फ्लाइट टिकट बुक करने की सोच रहे हैं, तो अपनी जेब ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो (IndiGo) ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में हवाई किराए में बढ़ोतरी को टालना बेहद मुश्किल होगा। कंपनी के टॉप प्रबंधन का कहना है कि आसमान छूती ईंधन (एटीएफ) की कीमतों के कारण एयरलाइंस पर वित्तीय दबाव काफी बढ़ गया है, जिससे उनके पास किराए बढ़ाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता है।

ईंधन की रिकॉर्ड कीमतें बनीं मुख्य वजह

हवाई जहाज चलाने के कुल खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा एटीएफ यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल का होता है। मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और वैश्विक अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है। सितंबर तिमाही में इंडिगो के कुल परिचालन खर्च में अकेले ईंधन का हिस्सा करीब 38 प्रतिशत रहा। एयरलाइन का कहना है कि 47 वर्षों के विमानन अनुभव में उन्होंने ईंधन की इतनी ऊंची और असामान्य दरें कभी नहीं देखीं। यही वजह है कि एयरलाइन अब इस बढ़ते खर्च का कुछ बोझ यात्रियों पर डालने की तैयारी कर रही है।

कोई चारा नहीं बचा है – CEO विली वॉल्श

मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक एयरलाइन के CEO विली वॉल्श का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतें पूरे उद्योग पर दबाव डाल रही हैं। ऐसे में एयरलाइनों के पास इस बोझ का कुछ हिस्सा यात्रियों पर डालने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा है। कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद मीडिया से बात करते हुए वॉल्श ने कहा कि एविएशन इंडस्ट्री में अपने 47 वर्षों के करियर में उन्होंने ईंधन की कीमतों को कभी इतने ऊंचे स्तर पर नहीं देखा। उन्होंने कहा कि मैं इस इंडस्ट्री में 47 सालों से हूं। मैंने पहले भी ईंधन की ऐसी कीमतें देखी हैं जिन्हें मैंने काफी महंगा माना था, लेकिन ऐसा नजारा मैंने पहले कभी नहीं देखा।वित्तीय नतीजे: राजस्व बढ़ा लेकिन घाटा बरकरार

हाल ही में जारी तिमाही नतीजों के अनुसार, जुलाई से सितंबर की अवधि में इंडिगो का कुल खर्च 19.2% बढ़कर 26,357 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि, कंपनी की कुल कमाई (राजस्व) भी 26% बढ़कर 23,364 करोड़ रुपये दर्ज की गई। यात्रियों से अधिक कमाई होने के बावजूद ईंधन के भारी खर्च के कारण कंपनी को 2,055 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा झेलना पड़ा है। हालांकि, यह घाटा पिछले साल की इसी तिमाही (2,614 करोड़ रुपये) के मुकाबले कम है, लेकिन यह लगातार तीसरी तिमाही है जब इंडिगो को नुकसान का सामना करना पड़ा है।

उड़ानों की संख्या सीमित करेगी एयरलाइन

बढ़ते खर्चों पर लगाम लगाने के लिए इंडिगो केवल टिकट महंगे करने पर ही निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि वह अपनी उड़ानों की संख्या (कैपेसिटी) और नए रूटों के विस्तार की गति को भी धीमा करेगी। दिसंबर तिमाही में कंपनी उड़ानों की संख्या में मामूली वृद्धि ही करने की योजना बना रही है। एयरलाइन हर रूट पर यात्रियों की मांग, ईंधन की लागत और भू-राजनीतिक माहौल का सावधानीपूर्वक समीक्षा करेगी। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय रूटों की उड़ानों में कटौती या बदलाव किए जाने की अधिक संभावना है, जबकि घरेलू उड़ानों की मांग त्योहारी सीजन के कारण मजबूत बनी हुई है।

शेयर बाजार का सकारात्मक रुख और विश्लेषकों की राय

तिमाही घाटे के बावजूद शेयर बाजार में इंडिगो (इंटरग्लोब एविएशन) के प्रति निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। नतीजे आने के बाद कंपनी के शेयर करीब 3% की बढ़त के साथ 4,810 रुपये के स्तर पर पहुंच गए। वित्तीय विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्मों (जैसे जेफरीज और एम्बिट कैपिटल) का मानना है कि इंडिगो में किराए बढ़ाने, लागत को नियंत्रित करने और विमानों का कुशलतापूर्वक उपयोग करने की मजबूत क्षमता है। बाजार एक्सपर्ट्स के अनुसार, उच्च किराए की नीति से एयरलाइन को महंगे ईंधन की भरपाई करने में मदद मिलेगी।

मुख्य बातें एक नजर में:-

  • महंगा ईंधन: परिचालन खर्च का 38% हिस्सा केवल ईंधन पर खर्च हो रहा है।
  • तिमाही घाटा: सितंबर तिमाही में कंपनी को 2,055 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
  • उड़ानों में बदलाव: अंतरराष्ट्रीय रूटों पर उड़ानों का संयोजन और समीक्षा की जाएगी।
  • यात्रियों को सलाह: त्योहारी व आगामी सीजन में हवाई टिकटों की दरों में बढ़ोतरी संभावित है।

हवाई यात्रियों के लिए क्या हैं मायने?

इंडिगो ने अभी तक किसी निश्चित तारीख या पूरे नेटवर्क के लिए एकमुश्त किराया बढ़ाने का औपचारिक ऐलान नहीं किया है। लेकिन एयरलाइन का स्पष्ट संदेश है कि जब तक ईंधन की दरें ऊंची रहेंगी, तब तक पुराने किराए बनाए रखना संभव नहीं होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले हफ्तों में, विशेष रूप से व्यस्त रूटों और सीमित सीटों वाली उड़ानों पर, यात्रियों को टिकट के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। यदि आप आने वाले दिनों में यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो अंतिम समय की महंगाई से बचने के लिए जल्द बुकिंग करना ही बेहतर विकल्प होगा।

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