तीन कर्मचारी राजस्व कार्यालय में दे रहे सेवाएं, विद्यार्थियों की राशि से प्रतिवर्ष लाखों वेतन भुगतान का आरोप
पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। शंकरसाव पटेल शासकीय महाविद्यालय वारासिवनी में जनभागीदारी के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और अन्य विभागों में उनकी संलग्नता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक ओर महाविद्यालय में जनभागीदारी के माध्यम से बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। वहीं दूसरी ओर महाविद्यालय परिसर में जगह जगह गंदगी और झाडियां दिखाई दे रही हैं। ऐसे में विद्यार्थियों से प्राप्त जनभागीदारी राशि के सदुपयोग को लेकर छात्र छात्राओं एवं नगर वासियों में नाराजगी देखी जा रही है। जिले में शंकरसाव पटेल शासकीय महाविद्यालय वारासिवनी दूसरा बड़ा महाविद्यालय हैं जहाँ वारासिवनी के अलावा खैरलांजी, कटंगी, लालबर्रा, तिरोड़ी, बालाघाट सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। विद्यार्थियों की सुविधा तथा महाविद्यालय की विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए जनभागीदारी के माध्यम से जनभागीदारी कर्मचारी, ऑपरेटर एवं शिक्षकों सहित ३५ से अधिक कर्मचारियों को कार्य पर रखा गया है। इन कर्मचारियों को पद के अनुसार करीब ८५०० से १७००० रुपये प्रतिमाह तक मानदेय दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
तीन कर्मचारी लंबे समय से राजस्व कार्यालय में है संलग्न
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जनभागीदारी के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों में से करीब तीन कर्मचारी वर्तमान में राजस्व विभाग के कार्यालय में सेवाएं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों को निर्वाचन कार्य के नाम पर एसडीएम कार्यालय में बुलाया गया था। लेकिन निर्वाचन कार्य समाप्त होने के बाद भी उन्हें महाविद्यालय में वापस नहीं भेजा गया है। वहीं इन कर्मचारियों के वेतन का भुगतान अभी भी महाविद्यालय की जनभागीदारी निधि से ही किया जा रहा है। यानी कर्मचारी अपनी सेवाएं राजस्व कार्यालय में दे रहे हैं जबकि उनके वेतन का भार महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों से प्राप्त जनभागीदारी राशि पर पड़ रहा है। इस व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि जब कर्मचारियों की सेवाएं महाविद्यालय के विद्यार्थियों एवं संस्थान की व्यवस्थाओं के लिए निर्धारित हैं तो उन्हें लंबे समय तक दूसरे विभाग में क्यों रखा गया है। जानकारी के अनुसार इन तीन कर्मचारियों पर जनभागीदारी निधि से करीब ४ लाख रुपये वार्षिक वेतन खर्च होने का अनुमान है। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के समय से ये कर्मचारी महाविद्यालय में वापस उपस्थित नहीं हुए है,जबकि निर्वाचन कार्य में लगाए गए अन्य कर्मचारी अपने अपने मूल विभागों में वापस लौट चुके हैं।
५० लाख रुपये वार्षिक खर्च फिर भी सफाई व्यवस्था बदहाल
महाविद्यालय में जनभागीदारी के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों पर प्रतिवर्ष करीब ५० लाख रुपये की राशि खर्च होने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद महाविद्यालय परिसर की स्थिति कई स्थानों पर अपेक्षा के अनुरूप नजर नहीं आ रही है। वर्तमान में परिसर के आसपास एवं अंदर बड़ी बड़ी झाडिय़ां फैल गई हैं। कई स्थानों पर साफ सफाई का अभाव दिखाई देता है। सार्वजनिक शौचालय के आसपास भी पर्याप्त सफाई नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है जिससे विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जनभागीदारी कर्मचारियों में एक बड़ा वर्ग ऐसे कर्मचारियों का है जिनकी जिम्मेदारी कार्यालयीन कार्यों के साथ साथ महाविद्यालय परिसर की साफ. सफ ाई एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं से जुड़ी हुई है। इसके बावजूद परिसर में नियमित सफाई और रखरखाव का अभाव दिखाई देना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
विद्यार्थियों की राशि का सदुपयोग कर जांच की जायें
छात्र छात्राओं एवं नगरवासियों का कहना है कि जनभागीदारी के नाम पर विद्यार्थियों से प्राप्त राशि का उपयोग उनकी सुविधाओं और महाविद्यालय के विकास में होना चाहिए। यदि जनभागीदारी से नियुक्त कर्मचारियों का वेतन इसी राशि से दिया जा रहा है तो उनसे निर्धारित कार्य भी कराया जाना चाहिए। वहीं जो कर्मचारी लंबे समय से अन्य विभागों में संलग्न हैं उन्हें तत्काल महाविद्यालय में वापस बुलाकर विद्यार्थियों की सुविधा एवं महाविद्यालय की व्यवस्थाओं में लगाया जाना चाहिए। इस संबंध में पूर्व में भी जनभागीदारी समिति एवं महाविद्यालय प्रबंधन का ध्यान आकर्षित कराया जा चुका है लेकिन अभी तक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।







































