ज्योतिष के मुख्य तीन आयाम हैं, शास्त्रीय भाषा में त्रिस्कन्ध ज्योतिष कहा जाता है, जिसमें सिद्धान्त ज्योतिष, गणित ज्योतिष और फलित ज्योतिष आते हैं। प्राचीन काल से पंचांग आदि को देखकर अथवा ज्योतिर्विदों से पूछकर शुभ समय जानकर ही लोग अपने कार्यों को संपादित करते आ रहे हैं। शुभ-अशुभ समय के ज्ञान हेतु तिथि, नक्षत्र, वार, योग, करण, जन्मपत्री में चलने वाली दशा, गोचर इत्यादि की आवश्यकता होती है। इन सबकी गणना जिसके द्वारा होती है उसे ज्योतिष शास्त्र कहा जाता है, सिद्धांत स्कन्ध में सिद्धान्त ज्योतिष के सूत्रों का उल्लेख है।
किस समय में किस कार्य को करने से सफलता और किस समय विफलता होती है, इन सब बातों का परीक्षण करके मानव के कल्याण एवं उपकार हेतु ऋषि-महर्षियों ने जो आदेश एवं दिशा-निर्देश दिए हैं, वे संहिता स्कन्ध में संकलित हैं। किस काल में उत्पन्न प्राणियों को देह, रूप, शील, धन, पुत्र, स्त्री आदि से किस प्रकार का सुख अथवा दुख होता है तथा किसके लिए किस प्रकार का शुभ-अशुभ समय कब आता है इसका ज्ञान जिस माध्यम से होता है, वह होरा स्कन्ध कहलाता है।













































