नियुक्ति दिनांक से दिया जाए सत प्रतिशत वेतनमान का लाभ, जबरन वसूली पर भी लगे रोक

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वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन,
10 साल से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों ने गिनाई समस्याए
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पदमेश न्यूज़।बालाघाट। मध्य प्रदेश वन एवं वन्य प्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ ने शुक्रवार को अपनी विभिन्न लंबित मांगों और कर्मचारियों के साथ हो रही वेतन विसंगति के विरोध में मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संघ ने वर्ष 2019 से वन विभाग में नियुक्त हो रहे कर्मचारियों को प्रथम वर्ष में 70 प्रतिशत, द्वितीय वर्ष में 80 प्रतिशत और तृतीय वर्ष में 90 प्रतिशत वेतन दिए जाने की व्यवस्था समाप्त कर नियुक्ति दिनांक से ही शत-प्रतिशत वेतनमान दिए जाने की मांग की है। इसके साथ ही संघ ने वन राजस्व हानि के नाम पर कर्मचारियों से कथित तौर पर की जा रही जबरन वसूली पर रोक लगाने, गोपनीय प्रतिवेदन में प्रतिकूल टिप्पणियों की व्यवस्था में पारदर्शिता लाने तथा वर्षों से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों को न्याय दिलाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है

वनों को नुकसान पहुंचाए कोई और, वसूली कर्मचारी से क्यों?
ज्ञापन में संघ ने वन राजस्व हानि के मामले को भी गंभीरता से उठाया है।बताया गया कि वनों से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में जलाऊ लकड़ी और निस्तार के लिए होने वाली गतिविधियों के साथ ही चरवाहों एवं असामाजिक तत्वों द्वारा कई बार जंगलों को नुकसान पहुंचाया जाता है। इससे वन राजस्व की हानि होती है। ऐसे मामलों में बेगुनाह कर्मचारियों पर आर्थिक भार न पड़े, इसके लिए राज्य शासन द्वारा क्षतिपूर्ति की व्यवस्था बनाई गई है। इस व्यवस्था के तहत वन राजस्व हानि को लेखन करने के लिए निर्धारित अधिकार दिए गए हैं। संघ के अनुसार वन मंडल अधिकारी को 2 हजार रुपए तक, वन संरक्षक को 5 हजार रुपए तक तथा 5 हजार रुपए से अधिक की राजस्व हानि के मामलों में राज्य शासन की अनुमति लेकर कार्रवाई करने की व्यवस्था है।इसके बावजूद संघ ने आरोप लगाया कि कई मामलों में अधिकारियों द्वारा वन कर्मचारियों से कथित तौर पर जबरन वसूली की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि जिन मामलों में उनकी व्यक्तिगत गलती या संलिप्तता नहीं होती, उनमें भी आर्थिक दंड का भार उन पर डाला जा रहा है।

समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था हो
संघ पदाधिकारियों ने बताया है कि वन विभाग में नवनियुक्त कर्मचारी भी नियुक्ति के साथ ही अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी क्षमता के साथ करते हैं। ऐसे में उन्हें कई वर्षों तक पूर्ण वेतन से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है। संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वेतन विसंगति को दूर करते हुए शीघ्र आदेश जारी किए जाएं, ताकि नवनियुक्त कर्मचारियों को समानता और न्याय मिल सके।

बिना सूचना गोपनीय प्रतिवेदन में प्रतिकूल टिप्पणी का आरोप
संघ ने ज्ञापन के माध्यम से अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों के गोपनीय प्रतिवेदन में बिना पूर्व सूचना प्रतिकूल टिप्पणी किए जाने का मुद्दा भी उठाया। पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों को कई बार यह जानकारी तक नहीं दी जाती कि उनके विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की गई है। बाद में यही टिप्पणियां उनके सेवाकाल और पदोन्नति के अवसरों को प्रभावित करती हैं।संघ ने मांग की है कि गोपनीय प्रतिवेदन की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और कर्मचारी को उसके विरुद्ध की गई प्रतिकूल टिप्पणी की जानकारी देकर नियमानुसार अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया जाए।

लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 में संशोधन की मांग
संघ ने ज्ञापन में लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के प्रावधानों में आवश्यक संशोधन करने की मांग भी की है। संघ ने उप नियम 10 (2) के अनुसार लघु शास्ति के अंतर्गत वसूली की प्रभावशीलता अवधि को एक वर्ष रखने संबंधी व्यवस्था को समाप्त करने की मांग उठाई है।इसके अलावा उप नियम 11 (6.2) के अंतर्गत गोपनीय प्रतिवेदन के अंक 12 के स्थान पर पूर्व की व्यवस्था के अनुसार 10 अंक किए जाने की मांग की गई है। संघ ने मांग की है कि जिन कर्मचारियों को बिना किसी गंभीर गलती के वसूली या वसूली प्रस्तावित होने के कारण पदोन्नति से वंचित किया गया है, उन्हें पात्रता के आधार पर पदोन्नति का लाभ प्रदान किया जाए।

न्यायोचित मांगों पर शीघ्र निर्णय की अपेक्षा
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और इनका सीधा प्रभाव वन विभाग के कर्मचारियों तथा उनके परिवारों पर पड़ रहा है। वेतन विसंगति समाप्त कर नियुक्ति से शत-प्रतिशत वेतनमान देने, अनुचित वसूली पर रोक लगाने और पद

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