डिंडोरी सीएमएचओ मनोज पांडेय को सौंपी गई जिला स्वास्थ्य व्यवस्था की कमान
आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं पर उठ रहे सवालों के बीच प्रशासनिक फेरबदल,
नए अधिकारी के सामने व्यवस्था सुधारने की बड़ी चुनौती
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पदमेश न्यूज़। बालाघाट। जिले के आदिवासी अंचलों में बच्चों की लगातार मौत के मामले ने अब स्वास्थ्य विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करा दिया है। स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवालों और बढ़ते दबाव के बीच मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) परेश उपलप को उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह जिला डिंडोरी के सीएमएचओ मनोज पांडेय को एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की कमान सौंपी गई है।आपको बताए कि आदिवासी क्षेत्रों में पिछले दिनों बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने और उपचार के दौरान मौतों के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में थी। मामले को लेकर आदिवासी समाज, राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों की ओर से लगातार जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई जा रही थी। इसी बीच सीएमएचओ के पद पर बदलाव को स्वास्थ्य विभाग में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है। ज्ञात होगी डॉ पांडेय इसके पूर्व भी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की कमान संभाल चुके हैं
लगातार उठ रहे थे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
बच्चों की मौत के मामले के सामने आने के बाद से ही जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हुए। खासकर दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में समय पर उपचार, स्वास्थ्य अमले की उपलब्धता, बीमारी की पहचान और ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मामले को लेकर विरोध-प्रदर्शन भी हुए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज होती गई। हालांकि यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया बताई गई है लेकिन जानकारों का मानना है कि लगातार हो रही बच्चों की मौत वाले मामले और विभिन्न पार्टियों व संगठनों के बढ़ते दबाव के चलते हैं डॉ उपलप को हटाया गया है और उनकी जगह पूर्व सीएचएमओ डॉ पांडेय को जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की कमानसन की गई है
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर कार्रवाई
जानकारी के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के निर्देश पर सीएमएचओ परेश उपलप को हटाने की कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही डिंडोरी के सीएमएचओ मनोज पांडेय को जिला स्वास्थ्य अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासनिक बदलाव के बाद अब जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नए सिरे से काम शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
नए सीएमएचओ के सामने कई चुनौतियां
मनोज पांडेय के सामने सबसे बड़ी चुनौती आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना होगी। दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य अमले की नियमित पहुंच, बीमार बच्चों की समय पर पहचान, बेहतर उपचार व्यवस्था और गंभीर मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था को प्रभावी बनाना अहम होगा।
वहीं, बच्चों की मौत के मामले में कार्रवाई की मांग कर रहे लोगों की नजर अब इस बात पर भी रहेगी कि प्रशासनिक बदलाव के बाद स्वास्थ्य विभाग की जमीनी व्यवस्था में कितना सुधार आता है। सीएमएचओ को हटाए जाने की कार्रवाई को लगातार बढ़ते जनदबाव के बीच सरकार के महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।










































