ढाका: बांग्लादेश के जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि भारत अगर जबरदस्ती लोगों को सीमा के अंदर भेजता रहा तो द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं। उनका कहना है कि भारतीय अधिकारियों की तरफ से लोगों को बांग्लादेश भेजने की लगातार कोशिशों से ढाका और दिल्ली के रिश्तों में और तनाव आ सकता है जबकि दोनों देशों के लिए स्थिर रिश्ते बनाए रखना बहुत जरूरी है। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार आने के बाद कथित तौर बांग्लादेश के अवैध नागरिकों को जबरदस्ती उनके देश भेजा जा रहा है।
भारत उस वक्त ‘अवैध’ प्रवासियों को भेज रहा है जब बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार बनने के बाद से दोनों देशों ने मोहम्मद यूनुस के समय खराब हुए संबंधों की मरम्मत शुरू कर दी है। इस बीच पंचगढ़ बॉर्डर पर पिछले तीन दिनों से फंसे हुए करीब 10 लोगों को लेकर भारत की बीएसएफ और बांग्लादेश के बीजीपी के बीच फ्लैग मीटिंग नाकाम हो गई है। आपको बता दें कि पंचगढ़ सदर उपजिले में बाराबारी-प्रधानपारा बॉर्डर पर ‘नो-मैन्स लैंड’ में दस लोग जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं तीन दिनों से फंसे हुए हैं। यह स्थिति तब बनी जब बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने भारत के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की कथित तौर पर लोगों को जबरन अंदर भेजने की कोशिश को नाकाम कर दिया।भारत-बांग्लादेश संबंध हो जाएंगे खराब- एक्सपर्ट
ढाका यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस के पूर्व प्रोफेसर डॉ. सीआर अबरार ने द डेली स्टार से बात करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच कई मुद्दे लंबित हैं जैसे तीस्ता जल-बंटवारे का लंबे समय से लंबित समझौता अभी भी सुलझा नहीं है जबकि गंगा जल-बंटवारा संधि दिसंबर में खत्म हो रही है और इसके नवीनीकरण के लिए राजनीतिक बातचीत की जरूरत होगी। उन्होंने कहा ‘लोगों को जबरन वापस भेजना और सीमा पर हत्याएं गैर-न्यायिक हरकतें हैं जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करती हैं।’ उन्होंने कहा “लोगों को ‘नो-मैन्स लैंड’ में फंसाकर छोड़ देना एक मानवीय संकट पैदा करता है। यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।”










































