50 से ज्यादा महिलाओं ने कलेक्टर परिसर में लगाए नारे, पुलिस पहुंची मौके पर,
प्रशासन ने 10 दिन में भुगतान का दिया भरोसा, लिखित आश्वासन नहीं मिलने से आंदोलन जारी रखने पर अड़ीं रसोइया,
सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाली रसोइया बहनों का आक्रोश अब जिला प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गया है। चार महीने से मानदेय नहीं मिलने और मध्यान्ह भोजन के लिए राशन व अन्य सामग्री उपलब्ध नहीं कराए जाने से परेशान केंद्रीय मध्यान्ह भोजन रसोई संगठन से जुड़ी 50 से अधिक महिलाएं मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचीं। अपनी समस्या का ज्ञापन देने के बाद महिलाएं कलेक्टर कार्यालय परिसर में ही धरने पर बैठ गईं और देखते ही देखते नारेबाजी शुरू कर दी। करीब चार घंटे तक चले इस घटनाक्रम से कलेक्ट्रेट में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की सक्रियता के बाद मामला संभाला जा सका।
रसोइया बहनों का कहना है कि उन्हें करीब चार माह से मानदेय नहीं मिला है। इतना ही नहीं, स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने के लिए विभाग से मिलने वाली खाद्यान्न सामग्री और अन्य आवश्यक सामग्री भी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। कई रसोइया बहनों ने बताया कि बच्चों का भोजन बंद न हो, इसलिए वे अपनी जेब से या उधार लेकर सामग्री खरीदकर खाना बनाती रहीं, लेकिन अब स्थिति यह हो गई है कि वे खुद कर्ज में डूब गई हैं। एक तरफ मानदेय नहीं मिलने से घर का खर्च चलाना मुश्किल है तो दूसरी तरफ बच्चों के भोजन की व्यवस्था के लिए भी उधार लेना पड़ रहा है। जिले में रसोइया संगठनों का विरोध अलग-अलग स्तर पर चल रहा है। एक संगठन द्वारा जनपद पंचायत कार्यालय के सामने बीते दिनों से अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है। वहीं केंद्रीय मध्यान्ह भोजन रसोई संगठन की आधा सैकड़ा से अधिक रसोइया बहनें पिछले दो दिनों से स्थानीय अर्पित संस्थान में बैठक कर आंदोलन की रणनीति बना रही थीं। 5 अक्टूबर को भी बैठक के बाद संगठन ने तय किया कि 6 अक्टूबर की जनसुनवाई में जिला प्रशासन के सामने अपनी समस्या मजबूती से रखी जाएगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार महिलाएं जनसुनवाई में पहुंचीं और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसके बाद बड़ी संख्या में रसोइया बहनें कलेक्टर कार्यालय के बाहर बैठ गईं। कुछ देर बाद महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर पहुंचीं और वहीं जमीन पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। महिलाओं की मांग थी कि पहले उनकी मुलाकात कलेक्टर से कराई जाए और चार महीने से लंबित मानदेय तथा खाद्यान्न की समस्या का तत्काल समाधान किया जाए। जब कलेक्टर से तत्काल मुलाकात नहीं हो सकी तो महिलाओं का आक्रोश और बढ़ गया। उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर ही नारेबाजी शुरू कर दी। करीब 50-60 महिलाओं की सामूहिक नारेबाजी से पूरे परिसर में हलचल मच गई। विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी अपने कार्यालयों से बाहर निकलकर स्थिति देखने लगे। वहीं सुरक्षाकर्मी भी अलर्ट हो गए और पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपर कलेक्टर श्री बर्मन को दी गई। अपर कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद महिलाओं को परिसर में नारेबाजी नहीं करने के लिए समझाया गया। इसी दौरान कोतवाली पुलिस का बल भी कलेक्ट्रेट पहुंच गया। पुलिस और अधिकारियों ने महिलाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन रसोइया बहनें अपनी मांगों पर अड़ी रहीं। दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुआ यह घटनाक्रम शाम करीब 4 बजे तक कलेक्ट्रेट परिसर में चलता रहा। इसके बाद अपर कलेक्टर के हस्तक्षेप से जिला पंचायत में मध्यान्ह भोजन की जिम्मेदारी संभाल रही महिला अधिकारी को मौके पर बुलाया गया। उनसे योजना से संबंधित भुगतान और रसोइया बहनों की समस्याओं को लेकर जानकारी ली गई। अधिकारी ने भी महिलाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन रसोइया बहनें तत्काल समाधान की मांग पर अड़ी रहीं।
10 दिन का तहसीलदार ने दिया आश्वासन
मामला बढ़ता देख तहसीलदार छवि पंत और नायब तहसीलदार भी कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचीं। उन्होंने जिला पंचायत की संबंधित महिला अधिकारी को बुलाकर भुगतान और अन्य व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी ली। इसके बाद रसोइया बहनों से भी चर्चा की गई। प्रशासन की ओर से उन्हें करीब 10 दिन का समय देते हुए आश्वासन दिया गया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके खातों में लंबित मानदेय सहित अन्य राशि डालने की कार्रवाई की जाएगी। चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि कुछ रसोइया बहनों के आधार अपडेट और केवाईसी की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। तहसीलदार छवि पंत ने र…







































