दुनिया के ग्लेशियरों में कहां, कितनी बर्फ जमा है। इस सवाल के जवाब तक पहुंचते-पहुंचते रिसर्चर्स कभी एक नहीं होते। अब इस असंभव से काम को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने संभव करके दिखाया है। एआई ने जो डेटा तैयार किया है, उसे रिसर्चर्स भी सटीक मान रहे हैं, इसीलिए अगले 74 साल तक ग्लेशियरों के भविष्य का अनुमान लगाने के लिए इस AI डेटासेट का ही बेस के रूप में उपयोग किया जाएगा।
किसको मिली सफलता?
एक रिपोर्ट के अनुसार, वेनिस की का’ फोस्करी यूनिवर्सिटी और इटली के नेशनल रिसर्च काउंसिल के रिसर्चर्स ने मिलकर एक नया मशीन लर्निंग मॉडल तैयार किया है। इसका नाम IceBoost v2.0 है। इस एआई मॉडल ने पूरी दुनिया के ग्लेशियरों की मोटाई और उनके कुल आयतन का अबतक का सबसे सटीक नक्शा तैयार किया है।
AI ने कैसे पूरा किया यह काम
- पारंपरिक फिजिक्स मॉडल बनाने के बजाए रिसर्चर्स ने एआई मॉडल काे डायरेक्ट रियल डेटा से सीखने के लिए ट्रेन किया। एआई मॉडल- IceBoost v2.0 को दुनियाभर के ग्लेशियरों की मोटाई के 70 लाख से अधिक मापों पर ट्रेन किया है।
- एआई मॉडल ने जमीन की ढलान, बनावट, बर्फ की वेलोसिटी, तापमान जैसे 26 अलग-अलग मानकों को मिलाकर हर एक ग्लेशियर में बर्फ की मोटाई का अंदाजा लगाया है।
- दावा है कि पुराने तरीकों की तुलना में यह एआई मॉडल 40 फीसदी से अधिक रिजल्ट दे रहा है।
AI मॉडल ने क्या पता लगाया?
- एआई मॉडल से पता लगा है कि अंटार्कटिका और ग्रीनलैंड की मुख्य बर्फ की चादरों को छोड़कर दुनिया के ग्लेशियरों में लगभग 1.5 लाख क्यूबिक किलोमीटर बर्फ जमा है।
- ये सारे ग्लेशियर पूरी तरह पिघल जाते हैं, तो दुनिया भर में समुद्र का जलस्तर 32.3 सेंटीमीटर बढ़ जाएगा।
- पूर्वी ग्रीनलैंड के ‘गीकी पठार’ में ग्लेशियर 2 किलोमीटर तक मोटे हैं। AI मॉडल ने पाया कि यहां पहले के अनुमानों की तुलना में दोगुनी बर्फ मौजूद है।













































