जिला मुख्यालय से लगी ग्राम पंचायत डोंगरिया में तालाब की भूमि पर कथित अतिक्रमण और प्लाटिंग का मामला सामने आया है। रविवार 7 जून को ग्राम पंचायत डोंगरिया सहित आसपास के लगभग आधा सेकड़ा ग्रामीणों ने तालाब में हो रहे अतिक्रमण का विरोध करते हुए कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का प्रदर्शन सुबह 11 बजे से शुरू होकर दोपहर करीब ढाई बजे तक चला। इस दौरान ग्रामीणों ने तालाब को अतिक्रमण मुक्त कर संरक्षित करने की मांग उठाई। उनका आरोप था कि तालाब की जमीन पर लगातार प्लाटिंग की जा रही है, जिससे उसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। ग्रामीणों के अनुसार यह तालाब पहले लगभग साढ़े सात एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ था, लेकिन लगातार अतिक्रमण के कारण अब केवल दो से ढाई एकड़ ही बचा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार शिकायतें और विरोध दर्ज कराया गया, लेकिन संबंधित विभागों ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। मामले की जानकारी मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। वारासिवनी एसडीएम ने ग्रामीणों को पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे पुनः आंदोलन करेंगे। फिलहाल प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
जिला मुख्यालय से सटी ग्राम पंचायत डोंगरिया में स्थित वर्षों पुराने उमरिया तालाब को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब की भूमि पर अवैध रूप से प्लाटिंग कर उसे मिट्टी से भरने का कार्य किया जा रहा है, जिससे तालाब का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। इसी के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण तालाब स्थल पर एकत्रित हुए और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार उमरिया तालाब गांव का एक प्राचीन जलस्रोत है, जिसका क्षेत्रफल पहले लगभग साढ़े सात एकड़ से अधिक था। कुछ वर्ष पूर्व सड़क निर्माण के दौरान तालाब की करीब पौने दो एकड़ भूमि अधिग्रहित हो गई थी, जिसके बाद भी तालाब का क्षेत्रफल लगभग पांच एकड़ से अधिक बचा हुआ था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से कथित रूप से तालाब की जमीन पर प्लाटिंग कर मिट्टी डाली जा रही है, जिससे तालाब का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। ग्रामीण आशीष ठाकुर ने बताया कि यह तालाब केवल जल संग्रहण का माध्यम नहीं है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण स्रोत भी रहा है। बरसात के समय तालाब का पानी खेतों तक पहुंचता था और ग्रामीण इसकी मेड़ को व्यवस्थित कर जल संरक्षण का कार्य करते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष तालाब क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण और प्लाटिंग के कारण जल निकासी प्रभावित हुई, जिससे गांव में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित हो गई थी। उन्होंने बताया कि जो लोग तालाब की जमीन पर स्वामित्व का दावा कर रहे हैं, उनसे दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था, लेकिन मौके पर कोई भी व्यक्ति वैध दस्तावेज लेकर नहीं पहुंच सका। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं तालाब की मेड़ और सीमांकन को सुरक्षित करने की पहल शुरू की तथा प्रशासन को भी पूरे मामले की जानकारी दी। ग्रामीणों का कहना है कि यह तालाब सिंचाई विभाग से संबंधित है और वर्षों से गांव की जीवनरेखा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर 7 जून को दोपहर लगभग 11 बजे बड़ी संख्या में ग्रामीण तालाब स्थल पर एकत्रित हुए और विरोध प्रदर्शन किया। जनपद प्रतिनिधि बाबूलाल भगत ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले इस मामले को प्रशासन के समक्ष उठाया था और कई बार शिकायत भी की थी। उन्होंने बताया कि तालाब संरक्षण की मांग को लेकर उन्हें आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा, लेकिन अब जब तालाब का अस्तित्व ही संकट में है, तो ग्रामीणों के साथ खड़ा होना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि तालाब की भूमि पर लगातार अतिक्रमण हो रहा है, जिससे इसका मूल स्वरूप समाप्त होता जा रहा है। उनके अनुसार जिस तालाब का क्षेत्रफल कभी लगभग साढ़े सात एकड़ था, वह अब काफी छोटा हो गया है। इस जलस्रोत का उपयोग आसपास के कई गांवों के किसान सिंचाई के लिए करते रहे हैं। इसके अलावा धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों, विशेषकर मूर्ति विसर्जन जैसे आयोजनों में भी इस तालाब की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विरोध प्रदर्शन के दौरान अन्य ग्रामीणों ने भी कहा कि यह केवल एक तालाब नहीं बल्कि गांव की धरोहर है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले वर्षों में यह जलस्रोत पूरी तरह समाप्त हो सकता है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे तालाब संरक्षण की लड़ाई जारी रखेंगे और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ लगातार आवाज उठाएंगे।
प्रशासन हरकत में, एसडीएम पहुंचे मौके पर
मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन भी सक्रिय हो गया। मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया, वहीं वारासिवनी एसडीएम कार्तिक जायसवाल स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। मीडिया से चर्चा करते हुए एसडीएम ने कहा कि प्रारंभिक निरीक्षण में कुछ स्थानों पर प्लाटिंग और भूमि भराव जैसी गतिविधियां दिखाई दी हैं। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जल्द ही एक विशेष जांच दल गठित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जांच में स्थानीय पटवारी और राजस्व निरीक्षक को शामिल नहीं किया जाएगा, बल्कि दूसरे क्षेत्र के अधिकारियों की टीम बनाकर पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में तालाब की भूमि पर अतिक्रमण, अवैध प्लाटिंग या भूमि भराव की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ राजस्व एवं अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते तालाब को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण जलस्रोत हमेशा के लिए समाप्त हो सकता है।










































