दिन में गांव-खेतों के आसपास घूम रहा 8 साल का बाघ, ड्रोन से निगरानी

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15 दिनों से लगातार मूवमेंट, एक सप्ताह में चार मवेशियों का किया शिकार
अब धुर्वा में कैमरे में कैद हुआ बाघ, कई गांवों में पसरा सन्नाटा
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पदमेश न्यूज़।बालाघाट।वन परिक्षेत्र पश्चिम बैहर सामान्य के जंगल से लगे गांवों में पिछले करीब 15 दिनों से बाघ की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। करीब 8 वर्ष उम्र के इस बाघ का मूवमेंट अब रात के बजाय दिन में भी गांव और खेतों के आसपास देखा जा रहा है।बताया गया कि अब धुर्वा गांव में खेत के समीप विचरण करते बाघ को लोगों ने कैमरे में कैद किया। बाघ के लगातार दिखाई देने और एक सप्ताह के भीतर 4 मवेशियों का शिकार किए जाने के बाद ग्रामीण खेतों में जाने से भी डरने लगे हैं।

तीन शिफ्ट में गश्त, ड्रोन से रखी जा रही नजर
बाघ के बढ़ते मूवमेंट को देखते हुए वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। वन विभाग की टीम तीन शिफ्ट में जंगल और गांव से लगे क्षेत्रों में गश्त कर रही है। वहीं ड्रोन के माध्यम से बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। वन विभाग द्वारा ग्राम लिंगा, कुरेंडा, शेरपार, सिलगी और धुर्वा सहित आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। गांवों में मुनादी कराकर लोगों को अकेले खेत अथवा जंगल की ओर नहीं जाने की हिदायत दी जा रही है।

पहले रात में आता था, अब दिन में खेतों के आसपास दिख रहा
ग्रामीणों के अनुसार बैहर-परसवाड़ा क्षेत्र के जंगल कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र से लगे होने के कारण यहां अक्सर बाघों की आवाजाही बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय पहले तक बाघ रात के समय गांव के समीप दिखाई देता था, लेकिन अब दिन में ही खेतों और गांव की सीमा के आसपास पहुंच रहा है। इसके चलते कई गांवों में दिन के समय भी सन्नाटा पसरा रहता है। किसान खेतों में जाने से बच रहे हैं और ग्रामीण जरूरी काम के लिए भी घर से निकलने में डर रहे हैं।

पहले भी बाघ की मौजूदगी से दहशत, अब बढ़ा खतरा
बताया गया कि इस क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी परसवाड़ा क्षेत्र के लिंगा-पोंडी मार्ग के आसपास बाघ के दिखाई देने और सिलगी-कन्हार टोला क्षेत्र में मवेशियों के शिकार की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार बाघों की आवाजाही के कारण ग्रामीण लंबे समय से दहशत में हैं। अब एक सप्ताह में 4 मवेशियों के शिकार और दिन में बाघ के गांव-खेतों के आसपास घूमने से स्थिति और गंभीर हो गई है।

बाघ का रेस्क्यू करने की ग्रामीणों ने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाघ का इसी तरह लगातार गांवों और खेतों के आसपास मूवमेंट बना रहा तो किसी दिन इंसान और बाघ के बीच आमना-सामना होने से बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने वन विभाग से बाघ को रेस्क्यू कर किसी सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि बाघ के डर से खेती-किसानी सहित रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं।

सभी को सतर्क रहने कहा गया है- नामदेव
इस पूरे मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी कृष्ण कुमार नामदेव ने बताया कि बाघ की उम्र करीब आठ वर्ष प्रतीत होती है। उसकी गतिविधियों पर ड्रोन के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही है। किसानों से अपील की गई है कि वे अकेले खेतों में न जाएं और जिस दिशा में बाघ का मूवमेंट हो, उस ओर बिल्कुल न जाएं। सभी प्रभावित गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है।

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