टूटा-घिसा था बाएं जबड़े का दांत, पेट पूरी तरह खाली
शिकार करने में असमर्थता के चलते भूख से मौत की आशंका
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पदमेश न्यूज़।बालाघाट। बालाघाट जिले में बाघो की मौत का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है।आए दिनों सामने आ रही इन्हीं घटनाओं के बीच मंगलवार को दक्षिण सामान्य वन मंडल बालाघाट के कटंगी वन परिक्षेत्र अंतर्गत नहलेसरा सर्किल के कक्ष क्रमांक 762 स्थित नहलेसरा जलाशय में करीब 14 वर्ष के नर बाघ का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। शव करीब दो से तीन दिन पुराना बताया गया है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षेत्र को सील कर आसपास सर्चिंग कराई गई। डॉग स्क्वाड की मदद से भी जांच की गई। हालांकि बाघ की मौत किन कारणों से हुई फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन भूख की वजह से बुजुर्ग बाघ की मौत हुई होगी,ऐसी आशंकाए जताई जा रही है
पोस्टमार्टम में सामने आया अहम तथ्य
उधर मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुची वन्यप्राणी चिकित्सकों की टीम ने प्रोटोकाल के तहत बाघ के शव का पोस्टमार्टम किया। इस दौरान बाघ के बाएं जबड़े की ओर का एक दांत टूटा और बुरी तरह घिसा हुआ पाया गया। इसके अलावा उसके नाखून भी घिसे हुए मिले। बाघ का पेट पूरी तरह खाली था। इन परिस्थितियों को देखते हुए वन विभाग को आशंका है कि उम्र अधिक होने और दांत खराब होने के कारण बाघ शिकार करने में असमर्थ हो गया था और भोजन की तलाश में भटकते हुए नहलेसरा जलाशय पहुंचा होगा।जहां उसकी मौत हो गई होंगी।
पानी में गिरने से मौत की भी आशंका
वन विभाग के अनुसार बाघ भोजन की तलाश में जलाशय की ओर आया होगा। कमजोर स्थिति में पानी में गिरने के बाद उसकी मौत होने की संभावना भी जताई गई है। हालांकि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम और बिसरा जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। वन विभाग ने हार्ट और स्केल सहित बिसरा के नमूने सुरक्षित कर लिए हैं।
पेंच, कटंगी या सोनेवानी का है बाघ?
नहलेसरा जलाशय की सीमा कटंगी और सिवनी जिले के अरी क्षेत्र में आती है। बाघ का शव कटंगी सीमा में मिला है। अब वन विभाग बाघ की पहचान के लिए उसकी प्रोफाइल का मिलान कर रहा है। इससे पता लगाया जाएगा कि मृत बाघ पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी, कटंगी क्षेत्र अथवा सोनेवानी कंजर्वेशन रिजर्व से संबंधित था। पहचान के बाद बाघ की गतिविधियों और उसके क्षेत्र का भी पता चल सकेगा।
सीसीएफ-डीएफओ की मौजूदगी में हुआ पोस्टमार्टम
बाघ का शव जलाशय से बाहर निकालने के बाद सीसीएफ गौरव चौधरी, डीएफओ नित्यानंदम एल, तहसीलदार, नहलेसरा सरपंच और कोडमी सरपंच की मौजूदगी में पेंच टाइगर रिजर्व से पहुंची चिकित्सकों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। कार्रवाई पूरी होने के बाद वन विभाग के प्रोटोकाल के अनुसार जलाशय की पार पर बाघ का अंतिम संस्कार किया गया।
कटंगी-तिरोड़ी के जंगलों में बढ़ी वन्यप्राणियों की मौजूदगी
बताया गया कि कटंगी-तिरोड़ी क्षेत्र के जंगल सिवनी के पेंच टाइगर रिजर्व और महाराष्ट्र की सीमा से लगे हुए हैं। इसके चलते क्षेत्र में बाघ, तेंदुए समेत अन्य वन्यप्राणियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। वन विभाग के अनुसार वन्यप्राणियों की संख्या और गतिविधियां बढ़ने से उनके विचरण क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ रहा है।
इसके पूर्व करंट से हुई थी बाघ की मौत
आपको बताए कि 12 दिसंबर 2025 को आंजनबिहरी के घोड़ादेव बाबा मंदिर के पास भी एक बाघिन की करंट लगने से मौत हुई थी। इस मामले में आरोपियो की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है।
भूख से हुई होंगी बाघ की मौत- मेहरा
इस पूरे मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान एसडीओ कटंगी यशपाल मेहरा ने बताया कि नहलेसरा जलाशय में करीब 14 वर्ष के नर बाघ का शव मिला है। बाएं तरफ का एक दांत टूटा और घिसा हुआ था, जबकि नाखून भी घिसे मिले हैं। पेट पूरी तरह खाली था। प्रथम दृष्टया भूख के कारण कमजोर होने की आशंका है। बाघ कहां का है, यह प्रोफाइल मिलान के बाद स्पष्ट होगा। बिसरा कलेक्शन कर लिया गया है।










































