जिला अस्पताल बालाघाट में 208 कोबरा बटालियन के सहायक उप निरीक्षक एएसआई सत्येंद्र शाह 42 वर्ष के शव के पोस्टमार्टम में हुई देरी के मामले में जिला अस्पताल पुलिस चौकी प्रभारी सहायक उप निरीक्षक शिवदयाल पटले को पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उल्लेखनीय है कि एएसआई पटले आगामी सितंबर माह में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले में जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली और पोस्टमार्टम व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े होने लगे हैं।
अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
जानकारी के अनुसार 6 अगस्त की सुबह 208 कोबरा बटालियन बड़गांव (किरनापुर) में पदस्थ एएसआई सत्येंद्र शाह की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल बालाघाट लाया गया।जहां सुबह लगभग 9 बजे ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि उनकी मौत अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही हो चुकी थी।
ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण शुरू हुई औपचारिकता
मृत्यु की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल पुलिस चौकी ने पोस्टमार्टम की ऑनलाइन प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए संबंधित किरनापुर थाना को सूचना भेजी। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार पोस्टमार्टम तभी किया जाता है जब संबंधित थाना से मर्ग क्रमांक और पोस्टमार्टम पंजीयन संख्या ऑनलाइन प्राप्त हो जाए।
इसी दौरान पुलिस कर्मचारियों ने ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों से मानवीय आधार पर ऑफलाइन पोस्टमार्टम करने का अनुरोध भी किया।ताकि शव को शीघ्र परिजनों तक भेजा जा सके।
ड्यूटी डॉक्टरों पर सहयोग नहीं करने के आरोप
जानकारी के अनुसार सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक से ऑफलाइन पोस्टमार्टम करने का अनुरोध किया गया लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और ड्यूटी समाप्त होने पर चली गईं। इसके बाद दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक की ड्यूटी पर आए चिकित्सक से भी पुलिस कर्मियों तथा कोबरा बटालियन के अधिकारियों ने तत्काल पोस्टमार्टम करने का आग्रह किया।बताया गया है कि इस बीच लगभग 2:30 बजे किरनापुर थाना से मर्ग पंजीयन एवं पोस्टमार्टम रजिस्ट्रेशन भी प्राप्त हो गया था। इसके बावजूद आरोप है कि पोस्टमार्टम तत्काल शुरू नहीं किया गया और अंततः लगभग 4 बजे इसकी प्रक्रिया पूरी हो सकी। करीब 4:30 बजे शव को जिला अस्पताल से दिल्ली स्थित गृह निवास के लिए रवाना किया गया।पूरी प्रक्रिया के दौरान 208 कोबरा बटालियन की डिप्टी कमांडेंट डॉ. सानिया अमित मलानी, बटालियन के अधिकारी-कर्मचारी तथा जिला अस्पताल पुलिस चौकी का स्टाफ मौजूद रहा।
मानवीय संवेदनाओं की कमी के आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि चिकित्सक चाहें तो विशेष परिस्थितियों में ऑफलाइन प्रक्रिया के माध्यम से कम समय में पोस्टमार्टम किया जा सकता है। मृतक का शव दिल्ली भेजा जाना था। इसलिए पुलिस कर्मचारियों और कोबरा बटालियन के अधिकारियों ने शीघ्र पोस्टमार्टम कराने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद देरी होने से परिजनों और बटालियन के अधिकारियों को इंतजार करना पड़ा।
पुलिस कर्मचारीयो की शव फ्रीजर में न रहे, यही रहती है कोशिश
जिला अस्पताल पुलिस चौकी से जुड़े कर्मचारी वे हमेशा प्रयास करते हैं कि किसी भी मृतक का शव अनावश्यक रूप से अस्पताल के फ्रीजर में न रखा जाए। यदि शाम तक पोस्टमार्टम नहीं हो पाता तो कई बार एसडीएम से अनुमति प्राप्त कर पोस्टमार्टम की व्यवस्था कराई जाती है ताकि शव जल्द से जल्द परिजनों को सौंपा जा सके। जरूरत पड़ने पर शव को गंतव्य तक भेजने के लिए शासकीय वाहन की व्यवस्था भी कराई जाती है।
ऑनलाइन व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
जिला अस्पताल में कुछ माह पहले पोस्टमार्टम की ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना था लेकिन कई मामलों में औपचारिकताएं पूरी होने में देरी के कारण पोस्टमार्टम भी विलंब से होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आपात अथवा विशेष परिस्थितियों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए तो मृतकों के परिजनों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकता है।










































