सोशल मीडिया से शुरू हुई दोस्ती पहुंची शादी तक, संयुक्त टीम की समझाइश से टला बाल विवाह,

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जिले में बाल विवाह की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार वन स्टॉप सेंटर, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए नाबालिग बालिकाओं के विवाह को रुकवाया है। दोनों मामलों में बालिकाओं की उम्र वैधानिक विवाह आयु 18 वर्ष से कम पाई गई, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप कर विवाह संपन्न होने से पहले ही रोक लगा दी। वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी रचना चौधरी ने बताया कि जिले के बैहर और गढ़ी क्षेत्र में हाल ही में दो अलग-अलग बाल विवाह की सूचनाएं प्राप्त हुई थीं। सूचना मिलते ही विभागीय टीम मौके पर पहुंची और दस्तावेजों की जांच की। जांच में बालिकाओं की उम्र निर्धारित आयु से कम पाए जाने पर परिजनों को समझाइश देकर विवाह रोक दिया गया। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले गढ़ी क्षेत्र में एक बाल विवाह रोका गया था, जबकि अब बैहर क्षेत्र के एक गांव में दूसरी कार्रवाई की गई है। दोनों मामलों में विभाग ने परिवारों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी और नाबालिग बच्चों के विवाह के कानूनी एवं सामाजिक दुष्परिणामों से अवगत कराया। रचना चौधरी के अनुसार वर्ष 2023 से अब तक बैहर-गढ़ी क्षेत्र में हर वर्ष तीन से चार बाल विवाह के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक सोच, सामाजिक दबाव और जागरूकता की कमी के कारण आज भी कई परिवार कम उम्र में बच्चों का विवाह करने का प्रयास करते हैं। हालांकि विभाग लगातार जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को कानून और बाल अधिकारों के प्रति जागरूक कर रहा है।

आधुनिकता और शिक्षा के बढ़ते दायरे के बावजूद जिले के कई वनांचल एवं दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है। जागरूकता की कमी, सामाजिक रूढ़ियां, पारिवारिक दबाव और परंपरागत सोच के चलते कई स्थानों पर कम उम्र में विवाह कराने की घटनाएं सामने आ रही हैं। हालांकि महिला एवं बाल विकास विभाग, वन स्टॉप सेंटर, पुलिस विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों के कारण ऐसे मामलों में कमी देखने को मिल रही है और समय रहते कार्रवाई कर बाल विवाहों को रोका जा रहा है। बीते एक सप्ताह के भीतर जिले में दो बाल विवाह होने से पहले ही रोक दिए गए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि समय पर सूचना नहीं मिलती तो दोनों मामलों में नाबालिग बच्चों का विवाह संपन्न हो सकता था। विभाग अब ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ निगरानी तंत्र को और मजबूत करने में जुटा हुआ है। वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी रचना चौधरी ने बताया कि जिले के वनांचल क्षेत्रों में कई बार प्रेम संबंध, सामाजिक दबाव अथवा पारिवारिक सहमति के कारण कम उम्र में विवाह की तैयारी शुरू कर दी जाती है। हाल ही में गढ़ी क्षेत्र के एक गांव में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां प्रेम संबंध के चलते नाबालिगों का विवाह कराया जा रहा था। सूचना मिलते ही विभागीय अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और समझाइश देकर विवाह रुकवाया गया। इसी क्रम में बैहर विकासखंड की ग्राम पंचायत नव्ही में भी एक नाबालिग बालिका का विवाह होने की सूचना प्रशासन को प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संयुक्त टीम सक्रिय हुई और तत्काल गांव पहुंचकर मामले की जांच शुरू की। संयुक्त टीम में महिला एवं बाल विकास विभाग की श्रीमती प्रीति हरिनखेड़े, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैरालीगल वालंटियर मानिकराम टेकाम, पुलिस विभाग से सतीश टेकाम एवं नसीब धुर्वे तथा ग्राम पंचायत नव्ही के सरपंच मुकेश मरावी शामिल रहे। टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों के परिजनों से चर्चा की और बालक-बालिका से भी अलग-अलग पूछताछ की। जांच के दौरान दोनों के शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। दस्तावेजों के आधार पर बालिका की आयु 17 वर्ष 5 माह और बालक की आयु 22 वर्ष 7 माह पाई गई।

इंस्टाग्राम पर हुआ प्यार

जांच में यह भी सामने आया कि दोनों की पहचान लगभग एक वर्ष पूर्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और मित्रता प्रेम संबंध में बदल गई। इसके बाद दोनों ने विवाह करने का निर्णय ले लिया। इसी दौरान बालिका बिना परिजनों को बताए बालक के घर पहुंच गई थी, जिसके बाद विवाह की तैयारी की जा रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त टीम ने दोनों परिवारों को बुलाकर विस्तृत समझाइश दी।

अब बालिक होने के बाद होगीं शादी

अधिकारियों ने बाल विवाह के कानूनी और सामाजिक दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए बताया कि कम उम्र में विवाह होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है, स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं और उनका भविष्य भी प्रभावित होता है। टीम ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि बाल विवाह कराना, उसमें सहयोग करना या उसे बढ़ावा देना कानूनन अपराध है और इसके लिए दंड का प्रावधान भी है। अधिकारियों ने बालिका और उसके परिजनों को समझाया कि वैधानिक आयु पूर्ण होने के बाद ही विवाह का निर्णय लिया जाना चाहिए। समझाइश और परामर्श के बाद बालिका अपने परिवार के साथ घर लौटने के लिए तैयार हो गई और उसने यह आश्वासन दिया कि वह बालिग होने के बाद ही विवाह संबंधी निर्णय लेगी।

विभाग का लक्ष्य इन मामलों को शून्य तक लाना – रचना चौधरी

वन स्टॉप सेंटर की प्रभारी रचना चौधरी ने बताया कि विभाग लगातार स्कूलों, ग्राम पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों का भी सहयोग लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक जिले में प्रतिवर्ष चार से पांच बाल विवाह के मामले सामने आए हैं, जिन्हें समय रहते हस्तक्षेप कर रोका गया है। विभाग का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इन मामलों की संख्या को शून्य तक लाना है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि यदि कहीं बाल विवाह की तैयारी या आयोजन की जानकारी मिले तो तत्काल महिला एवं बाल विकास विभाग, वन स्टॉप सेंटर, पुलिस विभाग अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दें।

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