“33% आरक्षण का स्वागत, लेकिन शर्तों के साथ…” महिला आरक्षण पर अखिलेश यादव और मायावती ने उठाए सवाल

0

Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और बसपा (BSP) प्रमुख मायावती (Mayawati) ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रखी है। अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट X पर लिखा:

“महिला आरक्षण के साथ हैं पर उस भाजपाई चालबाजी के खिलाफ हैं, जो एक साजिश के तहत की जा रही है। भाजपाई और उनके संगी-साथी देश की सबसे बड़ी आबादी के वर्ग मतलब ‘पिछड़े वर्ग’ की महिलाओं के बारे में चुप्पी साधे बैठे हैं। ये संशोधन के नाम पर जो जल्दबाज़ी दिखा रहे हैं दरअसल उसके पीछे भाजपाइयों की मंशा ये है कि जनगणना न करनी पड़े क्योंकि अगर जनगणना हुई तो जातिवार आंकड़े भी देने पड़ेंगे और जातिवार आरक्षण भी। ये भाजपा का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है, जिसमें जनगणना आधारित परिसीमन को नकार कर पिछड़ों का अधिकार लूटा जा रहा है। आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर इसे लागू करने की छूट पार्टियों को मिलनी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा,

“ये लोकतंत्र के खिलाफ खुफिया लोगों की गुप्त योजना है, जो तब तक स्वीकार्य नहीं जब तक प्रक्रिया में सुधार नहीं।”

वहीं, मायावती ने भी महिला आरक्षण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा,

“केंद्र सरकार ने कल से संसद का तीन दिन का विशेष सत्र भी बुलाया है। देश में बहुजन समाज में से खासकर SC-ST व OBC समाज के हित व कल्याण की तरह ही महिला सशक्तिकरण की बातें बहुत की जाती है लेकिन सही नीयत, नीति व मजबूत इच्छा शक्ति के अभाव के कारण इस पर शायद ही कभी ठीक से अमल हो पाया है…”

मायावती ने आगे कहा,

“हमारी पार्टी बसपा देश की सवर्ण समाज की महिलाओं को उनकी आबादी के हिसाब से 50% आरक्षण देने की मांग लगातार करती आ रही है लेकिन जिसे कोई भी पार्टी अपने-अपने स्वार्थ व मजबूरियों के कारण मानने को तैयार नहीं दिखती हैं…”

मायावती 33% महिला आरक्षण के कदम का स्वागत करते हुए कहा,

“ऐसे में देश की संसद लोकसभा में व राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की प्रक्रिया को काफी लंबे इंतजार के बाद ही सही लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने की कार्रवाई का हमारी पार्टी स्वागत करती है।” वास्तव में महिला आरक्षण की असली हकदार… SC-ST व OBC समाज की महिलाओं को लेकर यदि इसमें अलग से आरक्षण की व्यवस्था की जाती है, जो नहीं की गई है तो ये उचित होने के साथ-साथ… ऐतिहासिक भी जरूर होता। लेकिन ऐसा नहीं होने से इन वर्गों की महिलाओं को क्या महिला आरक्षण का पूरा लाभ मिल पाएगा, इसमें काफी संदेह है…”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here