खराब कवरेज, पहली पीढ़ी के मॉडेम के गर्म होने और 4G के मुकाबले तेजी से बैटरी खत्म होने की वजह से 5G नेटवर्क की शुरुआत काफी मुश्किलों भरी रही। भले ही इन हार्डवेयर समस्याओं को समय के साथ ठीक कर लिया गया, लेकिन इनसे जुड़ी निगेटिव धारणाएं और गलतफहमियां आज भी बरकरार हैं, जिससे कई यूजर्स अपने फोन का यह बेहतरीन फीचर बंद रखके रखते हैं। हालांकि असलियत इससे काफी अलग है। मॉर्डन 5G तकनीक अब उतनी बैटरी नहीं लेती जितना दावा किया जाता है और असली समस्या 5G नेटवर्क नहीं बल्कि नेटवर्क कवरेज की कमी, ऐप्स का बैकग्राउंड विहेवियर और बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम है। आज हम 5G और फोन की बैटरी से जुड़े ऐसे बड़े मिथ के बारे में बात करेंगे, जिनकी सच्चाई बहुत कम लोग जानते हैं।बहुत ज्यादा लेता है बैटरी- मिथ
5G को लेकर आम गलतफहमी यह है कि 5G हर स्थिति में 4G के मुकाबले ज्यादा बैटरी खर्च करता है, जबकि असल में ऐसा नहीं है। स्टडीज से पता चला है कि 5G फोन में कुल मिलाकर सिर्फ 6% से 11% ज्यादा बैटरी खर्च होती है। शुरुआती दौर में जो फर्क देखा गया था, वह ज्यादातर mmWave कनेक्शन की वजह से था। यह नेटवर्क का अल्ट्रा-फास्ट वर्जन है, जिसे बनाए रखने के लिए ज्यादा पावर की जरूरत होती है।
5G कितनी पावर इस्तेमाल करेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि फोन कौन सा बैंड इस्तेमाल कर रहा है। लो-बैंड और मिड-बैंड 5G ज्यादातर लोग इस्तेमाल करते हैं। एनर्जी के इस्तेमाल के मामले में काफी हद तक 4G जैसे ही होते हैं। हाई-बैंड 5G ही एकमात्र ऐसा 5G है, जो ज्यादा पावर लेता है।













































