9 साल से ट्राई साइकिल और पेंशन नहीं मिली, दिव्यांग पति को पीठ पर लादकर कलेक्ट्रेट पहुंची बिंदूबाई तो तुरंत हुआ एक्शन

0

बुरहानपुर के महाजन कॉलोनी निवासी बुजुर्ग महिला बिंदूबाई अपने दिव्यांग पति दयाशंकर को पीठ पर लादकर कलेक्ट्रेट पहुंच गईं। महिला का आरोप है कि पति को पैरालिसिस होने और एक पैर काटने के बाद पिछले 9 साल से उन्हें ट्राई साइकिल और पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

बुरहानपुर: जिले से शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल झकझोर दिया है। महाजन कॉलोनी में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला अपने दिव्यांग पति को अपनी पीठ पर लादकर बुरहानपुर कलेक्ट्रेट पहुंच गई। महिला की पीड़ा है कि वह पिछले 9 साल से अपने पति के लिए एक ट्राई साइकिल और पेंशन की गुहार लगा रही है, लेकिन अब तक उसे सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं।

जनसुनवाई में पहुंची थी महिला

यह घटना मंगलवार की जनसुनवाई की बताई जा रही है, जिसका वीडियो शनिवार शाम सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे एक बुजुर्ग महिला अपनी उम्र और शारीरिक लाचारी को दरकिनार कर अपने पति को पीठ पर उठाने को मजबूर है।

9 साल पहले हुआ था पैरालिसिस, कटा एक पैर

महाजन कॉलोनी निवासी बिंदूबाई अपने पति दयाशंकर को लेकर कलेक्टर विवेक कुमार के पास जनसुनवाई में पहुंची थीं। बिंदूबाई ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि करीब 9 साल पहले उनके पति दयाशंकर को पैरालिसिस का अटैक आया था। इस गंभीर बीमारी के इलाज के दौरान संक्रमण और अन्य दिक्कतों की वजह से उनका एक पैर काटना पड़ गया था। तब से दयाशंकर पूरी तरह चलने-फिरने में असमर्थ हैं और बिस्तर या दूसरों के सहारे पर हैं।

सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाकर हुई परेशान

बिंदूबाई का कहना है कि पिछले 9 साल से वह अपने पति को इसी तरह पीठ पर बैठाकर या किसी की मदद से अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। उन्हें न तो अब तक नियमित पेंशन मिल पाई है और न ही आने-जाने के लिए ट्राई साइकिल या सही साधन मिल सका है। पति को हर जगह इस तरह लाने-ले जाने में उन्हें भारी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना व परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।अधिकारियों का पक्ष: नियम और समयसीमा का हवाला

इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभाग हरकत में आया है। निःशक्त कल्याण एवं दिव्यांग विभाग के अधिकारी दुर्गेश कुमार दुबे ने इस मामले पर सफाई दी है। उन्होंने बताया कि दयाशंकर को करीब 2 साल पहले एक शासकीय कार्यक्रम के दौरान व्हीलचेयर उपलब्ध कराई गई थी।

अधिकारी के मुताबिक, उस व्हीलचेयर की अवधि 3 साल होती है और नियमों के तहत एक निश्चित समयावधि पूरी होने के बाद ही दूसरी ट्राई साइकिल या उपकरण दिए जा सकते हैं। हालांकि, दुर्गेश कुमार दुबे ने यह भी स्पष्ट किया कि मामला अब वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आ चुका है और बुजुर्ग दंपती की मदद के लिए जल्द से जल्द उचित व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही, पेंशन से जुड़ी मांग को भी संबंधित विभाग के समक्ष रखकर प्रक्रिया तेज करने की बात कही गई है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here