परमाणु युद्ध की दहलीज पर दक्षिण एशिया? पाकिस्तान के न्यूक्लियर एडवाइजर की चेतावनी- शांति नहीं तबाही का संकेत

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान के स्ट्रेटेजिक प्लान्स डिवीजन (SPD) में आर्म्स कंट्रोल एडवाइजर जहीर काजमी ने चेतावनी दी है कि जिसे हम शांति समझ रहे हैं असल में उसके पीछे तबाही का संकेत छिपा है। उन्होंने ये चेतावनी कार्नेगी एंडोमेंट की उस रिपोर्ट पर दी है जिसमें कहा गया है कि दक्षिण एशिया में तनाव के बावजूद परमाणु खतरे की संभावना काफी कम है। कार्नेगी ने इस स्थिति को ‘स्थिर’ कहा है यानि खतरे की संभावना कम है। इसमें कहा गया है कि ‘असल में जिसे परमाणु खतरे के तौर पर देखा जा रहा है वो बयानबाजी का शोर है और तनाव बढ़ने के समय इसके जोखिम को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है।’

इसी आकलन रिपोर्ट को लेकर जहीर काजमी ने चेतावनी दी है कि ये विश्लेषण और निष्कर्ष गलत और गंभीर हैं। जहीर काजमी ने कहा है कि आकलन रिपोर्ट में कहा गया है कि सैन्य अभियान के बावजूद परमाणु खतरे की संभावना काफी कम करके दिखाया गया है लेकिन इस धारणा को दक्षिण एशिया का इतिहास समर्थन नहीं करता है और ये आकलन गलत है। जहीर काजमी पाकिस्तान सेना के पूर्व ब्रिगेडियर रह चुके हैं।

‘परमाणु खतरे की संभावना को कम करने के आकना गलत’

जहीर काजमी ने पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल में एक लेख में लिखा है ‘यह व्याख्या विश्लेषणात्मक दृष्टि से तो सुंदर है लेकिन रणनीतिक दृष्टि से अपूर्ण और खतरनाक है क्योंकि इससे संयम को तनाव बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण में बदलने का खतरा है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विश्लेषण के नीतिगत परिणाम भी होंगे। उन्होंने आगे लिखा है कि पश्चिमी विद्वान भारत और पाकिस्तान के बीच के तनाव को “शोर” मानकर कम आंक रहे हैं जबकि हकीकत में स्थिति ऐसी बन सकती है जहां से वापसी संभव नहीं है। कार्नेगी के रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि कारगिल युद्ध के बाद कोई बड़ा युद्ध नहीं हुआ है और दोनों देशों के बीच “सीमित युद्ध” मुमकिन है इसलिए परमाणु जंग की संभावना कम है ।

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