इंदौर: चर्चित हनी ट्रैप मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। शराब व्यवसायी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर को कथित रूप से ब्लैकमेल करने के मामले में एसआईटी ने मुख्य आरोपी अलका दीक्षित और उसके बेटे जयदीप दीक्षित का एक बार फिर कोर्ट से रिमांड मांगा है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में अभी कई महत्वपूर्ण तथ्यों की पुष्टि की जानी बाकी है और कुछ ऐसे साक्ष्य भी जुटाने हैं जो जांच को आगे बढ़ाने में अहम साबित हो सकते हैं।
पुलिस ने इस पूरे मामले में आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी हैं। जांच अधिकारियों का दावा है कि यह कोई सामान्य ब्लैकमेलिंग का मामला नहीं है बल्कि आरोपी संगठित गिरोह के रुप में काम कर रहे थे। गैंग में हर सदस्य की भूमिका पहले से तय थी। गिरोह के सदस्य अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। डीसीपी (क्राइम) राजेश त्रिपाठी के अनुसार इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी श्वेता जैन निवासी भोपाल, रेशू चौधरी निवासी सागर, लाखन चौधरी निवासी पीथमपुर, अलका दीक्षित और जयदीप दीक्षित निवासी द्वारकापुरी, विनोद शर्मा निवासी राजेंद्र नगर तथा जितेंद्र पुरोहित निवासी देवास वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।
मोबाइल, पेनड्राइव, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इसके अलावा तलाशी के दौरान कुछ दस्तावेज, अनुबंध पत्र, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री भी बरामद की गई है।
गिरोह में महिलाओं का काम व्यापारी-नेताओं को फंसाना था
पुलिस का कहना है कि गिरोह ने शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह को आपत्तिजनक फोटो और वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर एक करोड़ रुपये की मांग की थी। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह में शामिल महिलाओं का काम व्यापारियों और नेताओं को फंसाना था। वहीं पुलिसकर्मी विनोद कानूनी सलाह देने का काम करता था, जबकि जितेंद्र खुद को पत्रकार बताकर रुपयों की मांग करता था।










































