Petrol Price News: पेट्रोल से 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता है E85 ईंधन, 48 पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध, किन वाहनों में होगा इस्तेमाल?

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Petrol Price News : केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और पेट्रोल पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उच्च एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन ई85 (E85 fuel) की शुरुआत कर दी है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में एक पेट्रोल पंप पर इस नए ईंधन का शुभारंभ किया। सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल प्रदूषण कम करने में मदद करेगी, बल्कि किसानों और घरेलू एथनॉल उद्योग को भी मजबूती देगी। शुरुआत में 48 पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराया गया है। पेट्रोल (Petrol Price) के मुकाबले यह काफी सस्ता होगा।

पेट्रोल से 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता

सरकार ने E85 की कीमत आम पेट्रोल की तुलना में करीब 20 रुपये प्रति लीटर कम रखी है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इसका उद्देश्य देश में उत्पादित एथनॉल का सीधा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है। कम कीमत होने के कारण फ्लेक्स-फ्यूल वाहन चलाने वाले लोगों के ईंधन खर्च में कमी आएगी। इससे अधिक लोग भविष्य में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित हो सकते हैं।

शुरुआत में 48 पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध E85

फिलहाल E85 ईंधन की बिक्री देशभर में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के 48 चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर शुरू की गई है। सरकार चरणबद्ध तरीके से इसके वितरण नेटवर्क का विस्तार करने की योजना बना रही है। योजना के अनुसार, दिसंबर 2026 तक देश में करीब 500 पेट्रोल पंपों पर E85 उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद दिसंबर 2027 तक इसकी उपलब्धता बढ़ाकर करीब 5,000 पेट्रोल पंपों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे देश के अधिक हिस्सों में उपभोक्ताओं को इस ईंधन का लाभ मिल सकेगा।क्या है E85 ईंधन?

ई85 एक विशेष प्रकार का ईंधन है, जिसमें 80 से 85 प्रतिशत तक एथनॉल और 14 से 19 प्रतिशत तक पेट्रोल मिलाया जाता है। एथनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। चूंकि यह एक जैव-ईंधन (बायोफ्यूल) है, इसलिए इसे पेट्रोल की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल माना जाता है। सरकार का कहना है कि ई85 के उपयोग से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। इससे देश को ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

किन वाहनों में होगा इस्तेमाल?

E85 ईंधन का उपयोग केवल फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहनों में ही किया जा सकेगा। ऐसे वाहन ई20 से लेकर ई100 तक विभिन्न एथनॉल मिश्रण वाले ईंधनों पर चल सकते हैं। इन वाहनों में एक उन्नत इंजन कंट्रोल यूनिट (ईसीयू) लगी होती है, जो ईंधन में मौजूद एथनॉल की मात्रा के अनुसार इंजन की कार्यप्रणाली को स्वतः समायोजित कर लेती है। इस वजह से सामान्य पेट्रोल वाहनों में E85 का उपयोग नहीं किया जा सकता। वाहन मालिकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका वाहन फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक से लैस हो, तभी वे इस नए ईंधन का लाभ उठा सकेंगे।

एथनॉल मिश्रण बढ़ाने का लक्ष्य

सरकार का अनुमान है कि E85 के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के विस्तार से देश में एथनॉल मिश्रण का कुल स्तर तेजी से बढ़ेगा। पेट्रोलियम मंत्री ने बताया कि इस पहल से वर्ष 2030-31 तक भारत में एथनॉल मिश्रण का स्तर करीब 26 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह लक्ष्य भारत के स्वच्छ ऊर्जा अभियान और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। साथ ही, एथनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को भी बेहतर बाजार मिलने की संभावना है।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को होगा फायदा

एक्सपर्ट्स का मानना है कि E85 जैसे उच्च एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन का इस्तेमाल बढ़ने से वायु प्रदूषण कम होगा और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी आएगी। इसके अलावा, देश में उत्पादित एथनॉल के उपयोग से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार की यह नई पहल स्वच्छ, सस्ता और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।

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