आधुनिक तकनीक के दौर में पुलिस व्यवस्था भी तेजी से डिजिटल होती जा रही है। इसी दिशा में बालाघाट पुलिस ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पेट्रोल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएमएस) को लागू किया है, जिसने जिले में गश्त, निगरानी और अपराध नियंत्रण की व्यवस्था को पूरी तरह से नई दिशा दी है। पारंपरिक वायरलेस संचार और कागजी रिकॉर्ड पर आधारित व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए अब पुलिस की गतिविधियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मॉनिटर किया जा रहा है। जिले के प्रभारी मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के समक्ष 13 जून को पीएमएस का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रणाली किस प्रकार पुलिस की कार्यक्षमता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है। प्रस्तुतीकरण के बाद प्रभारी मंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह व्यवस्था अपराध नियंत्रण, अपराधियों की निगरानी और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने में बेहद उपयोगी साबित होगी।
पहले जिले में रात्रिकालीन गश्त, वाहन चेकिंग, होटल एवं लॉज निरीक्षण तथा संदिग्ध व्यक्तियों की निगरानी जैसी गतिविधियां मुख्य रूप से वायरलेस संदेशों और कागजी रजिस्टरों के माध्यम से संचालित होती थीं। इससे गश्ती दलों की वास्तविक स्थिति जानने और गतिविधियों की निगरानी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन पीएमएस लागू होने के बाद जिले के संवेदनशील क्षेत्रों, बाजारों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशन, होटल, लॉज और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को डिजिटल रूप से चिन्हित किया गया है। गश्ती दल अब इन स्थानों पर पहुंचकर ऑनलाइन अपनी उपस्थिति दर्ज करते हैं, जिससे प्रत्येक गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध हो जाता है। इस प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता लाइव लोकेशन ट्रैकिंग है। इसके माध्यम से वरिष्ठ अधिकारी किसी भी समय गश्ती दलों की लोकेशन, उनके रूट कवरेज और गतिविधियों की निगरानी कर सकते हैं। किसी आपात स्थिति या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर निकटतम पुलिस दल को तुरंत मौके पर भेजा जा सकता है। इससे प्रतिक्रिया समय में कमी आई है और पुलिस की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। बालाघाट पुलिस ने पीएमएस को केवल गश्त तक सीमित नहीं रखा है। इसके माध्यम से जेल से रिहा हुए व्यक्तियों की निगरानी, रात्रिकालीन संदिग्ध व्यक्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड, होटल एवं लॉज चेकिंग तथा वीआईपी कार्यक्रमों में तैनात पुलिस बल की लाइव मॉनिटरिंग भी की जा रही है। प्रतिदिन लगभग 70 से 80 व्यक्तियों की जानकारी इस प्रणाली में दर्ज की जा रही है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और विश्लेषण पहले की अपेक्षा कहीं अधिक प्रभावी हो गया है। पुलिस और जनता के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से जिले के विभिन्न थानों में क्यूआर कोड फीडबैक सिस्टम भी शुरू किया गया है। इस व्यवस्था के माध्यम से नागरिक पुलिस सहायता, शिकायतों के निराकरण, थाना स्टाफ के व्यवहार और पुलिस कार्रवाई को लेकर सीधे अपना फीडबैक दे सकते हैं। इससे पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है तथा आमजन की सहभागिता भी सुनिश्चित हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पीएमएस के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। रात्रिकालीन गश्त अधिक प्रभावी हुई है, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ी है और अपराधियों की गतिविधियों पर बेहतर निगरानी संभव हो सकी है। डिजिटल रिकॉर्ड और लाइव मॉनिटरिंग के कारण पुलिसिंग अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बन रही है। बालाघाट पुलिस की यह पहल आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसी डिजिटल व्यवस्थाएं पुलिस कार्यप्रणाली को और अधिक सशक्त बनाएंगी तथा आम नागरिकों की सुरक्षा और विश्वास को नई मजबूती प्रदान करेंगी। इस प्रस्तुतीकरण की स्वयं प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सराहना की। उन्होंने कहा कि बालाघाट पुलिस द्वारा विकसित यह सिस्टम स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में एक अभिनव पहल है। भविष्य में इस मॉडल को प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है। बालाघाट का यह पेट्रोल मैनेजमेंट सिस्टम पूरे प्रदेश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत होगा।










































