मनावर (धार)। नर्मदा पट्टी क्षेत्र में भिंडी की खेती किसानों के लिए नकद आय का भरोसेमंद जरिया बन गई है। कम समय में फसल तैयार होने और लगातार तुड़ाई से होने वाली आमदनी के कारण किसान इसे अब ”एटीएम फसल” कहने लगे हैं। मई-जून में बोई गई फसल अब तैयार होकर स्थानीय सब्जी मंडियों और खेरची बाजारों में पहुंच रही है, जहां शुरुआती दौर में किसानों को करीब 30 रुपये प्रति किलो तक भाव मिल रहे हैं।
मनावर के करोली, गांगली, एकलवारा, सिरसी, आछोदा, अजंदा, बालीपुर, मेहताखेड़ी सहित आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में किसान भिंडी की खेती कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार भिंडी की पहली तुड़ाई बुवाई के 40 से 50 दिन बाद शुरु हो जाती है। इसके बाद हर दो से चार दिन में तुड़ाई होने से किसानों को लंबे समय तक नियमित आय मिलती रहती है।
इस वर्ष रकबा बढ़कर करीब 35 से 40 हेक्टेयर तक पहुंच गया है
भिंडी की खेती के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। सिंचित क्षेत्रों में कई किसान ड्रिप सिंचाई अपनाकर कम पानी में बेहतर उत्पादन ले रहे हैं। उद्यानिकी विभाग के अनुसार पिछले वर्ष क्षेत्र में 22 से 25 हेक्टेयर में भिंडी की खेती हुई थी, जबकि इस वर्ष रकबा बढ़कर करीब 35 से 40 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।
खेरची बाजार में 30 रुपये किलो तक मिल रहा भाव
किसान माधव पाटीदार और सरला बाई पटेल ने बताया कि मई में बोई गई भिंडी अब उत्पादन देने लगी है। खेरची बाजार में करीब 30 रुपये प्रति किलो तक भाव मिलने से लागत निकलने के साथ अच्छी आय की उम्मीद है। किसान शंकर मुवेल ने बताया कि उनकी फसल में फूल और फल आ चुके हैं। नियमित सिंचाई, निंदाई-गुड़ाई और दवा का छिड़काव किया जा रहा है। मौसम अनुकूल रहा तो आने वाले दिनों में उत्पादन और बढ़ने की संभावना है।










































