पदमेश न्यूज़। बालाघाट। जिले के बिरसा क्षेत्र के आदिवासी अंचलों में विभिन्न बीमारियों से बच्चों की लगातार हो रही मौतों के विरोध में आंदोलनरत आदिवासी युवाओं ने इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया। युवाओं का कहना है कि समाज के करीब 25 बच्चों की मौत के बाद पूरे आदिवासी समाज में शोक का माहौल है, ऐसे में वे पर्व नहीं मना सकते।ज्ञात हो कि आदिवासी बच्चों की मौत के जिम्मेदारों पर कार्रवाई, मृतक बच्चों के परिजनों को मुआवजा सहित अन्य मांगों को लेकर आदिवासी युवा 21 अगस्त से जयस्तंभ चौक के समीप धरने पर बैठे हुए हैं।
अब तक 25 बच्चो की मौत की कही जा रही बात
जिले के बिरसा क्षेत्र की आदिवासी पंचायतों के गांवों और मंझरेटोलों में खसरा, मलेरिया, स्किन संबंधी बीमारी सहित अन्य बीमारियों के कारण करीब 25 बच्चों की मौत हो चुकी है। दो मंत्रियों के प्रभावित क्षेत्र के दौरे के बावजूद मृतक बच्चों के परिवारों के लिए सहायता राशि की कोई घोषणा नहीं होने और कथित रूप से लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से आदिवासी समाज एवं विपक्षी दलों में नाराजगी बनी हुई है।
ठोस कार्यवाही की मांग पर अड़े युवा
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जिला मलेरिया अधिकारी मनीषा जुनेजा का स्थानांतरण किए जाने तथा सीएमओ डॉ. परेश उपलप से टीकाकरण का प्रभार वापस लेने की कार्रवाई की गई है। हालांकि आदिवासी समाज और विपक्षी दल इसे पर्याप्त कार्रवाई नहीं मान रहे हैं। आंदोलनकारी युवाओं की मांग है कि पूरे मामले में जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य, मलेरिया, महिला एवं बाल विकास तथा पीएचई विभाग की व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाए।
हमने रक्षाबंधन नहीं मनाने का लिया है निर्णय -ललित
आंदोलनकारी ललित उईके ने बताया कि समाज के इतने बच्चों की मौत के बाद उनके घरों में मातम पसरा हुआ है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे भाई-बहन के प्रेम के पर्व को मनाना इस परिस्थिति में संभव नहीं है।
ललित उईके के अनुसार, बीमारी से प्रभावित गांवों के दो परिवारों में भाई और बहन की एक-एक दिन के अंतराल में मौत हो गई। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के दिन उन परिवारों पर क्या बीत रही होगी, जिनके घरों के भाई-बहन अब इस दुनिया में नहीं हैं। इन्हीं मृतक बच्चों और उनके परिवारों के प्रति शोक एवं संवेदना व्यक्त करने के लिए आंदोलनकारी युवाओं ने भी रक्षाबंधन नहीं मनाने का निर्णय लिया।










































