किसान मायूस होकर लगा रहे सोसायटियों के चक्कर
पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। वारासिवनी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत आने वाली १० सेवा सहकारी समितियों के सैकड़ों किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने के लिए पंजीयन नहीं करा पाने से परेशान हैं। पंजीयन की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद किसान लगातार समितियों के चक्कर लगा रहे हैं और कर्मचारियों से जानकारी ले रहे हैं कि पंजीयन दोबारा शुरू हुआ है या नहीं। लेकिन हर बार उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। ऐसे में किसानों के सामने अपनी खरीफ फसल के विक्रय को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सुस्त सर्वर और तकनीकी बाधाओं ने बढ़ाई मुश्किलें
प्राप्त जानकारी के अनुसार वारासिवनी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अंतर्गत आने वाली १० सेवा सहकारी समितियों में पंजीयन से वंचित रह गए ८८८ किसानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए पंजीयन नहीं हो पाने की जानकारी दी है। वहीं ऐसे अनेक किसान भी हैं जो अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद पंजीयन की अवधि बढऩे की उम्मीद में समिति तक नहीं पहुंचे। इन सभी को मिलाकर क्षेत्र में पंजीयन से वंचित किसानों की संख्या लगभग १००० से १२०० तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। विदित हो कि शासन के द्वारा खरीफ फ सल के समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिए १५ सितंबर से १० अक्टूबर तक किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया निर्धारित की गई थी। लेकिन इस पूरी अवधि के दौरान पोर्टल की धीमी गति और बार बार सर्वर डाउन होने की समस्या ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। पंजीयन कराने के लिए किसान लगातार सेवा सहकारी समितियों और ऑनलाइन सेंटरों के चक्कर लगाते रहे। इसके बावजूद कई किसानों को लंबी मशक्कत के बाद भी सफ लता नहीं मिल सकी और वे निर्धारित समय सीमा में अपना पंजीयन नहीं करा पाए। पंजीयन की तकनीकी समस्याओं को देखते हुए किसानों द्वारा लगातार शासन प्रशासन से पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की जाती रही। लेकिन निर्धारित अवधि में कोई राहत नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में किसान पंजीयन से वंचित रह गए। अब स्थिति यह है कि किसान अपनी उपज लेकर चिंतित हैं और उन्हें उम्मीद है कि शासन के द्वारा दोबारा पंजीयन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। समर्थन मूल्य पर उपज बेचने के लिए पंजीयन नहीं होने की स्थिति में किसानों के सामने अपनी फ सल व्यापारियों को बेचने का विकल्प ही शेष रह सकता है। किसानों का कहना है कि खुले बाजार में व्यापारियों को उपज बेचने पर उन्हें समर्थन मूल्य की तुलना में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। शासन की समर्थन मूल्य योजना का लाभ लेने के लिए उन्होंने खेती की है लेकिन तकनीकी समस्याओं और निर्धारित समय सीमा के कारण वे इस लाभ से वंचित होते नजर आ रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र के किसानों ने शासन एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि किसानों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए खरीफ फ सल उपार्जन के लिए पंजीयन प्रक्रिया दोबारा प्रारंभ की जाए अथवा विशेष पंजीयन अवधि निर्धारित की जाए, ताकि पंजीयन से वंचित सभी किसानों को अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने का अवसर मिल सके।
गिरदावरी सहित विभिन्न समस्याओं के कारण पंजीयन नहीं हो पाया-श्रीराम राहगंडाले
श्रीराम राहगंडाले ने बताया कि मैं सोसायटी पंजीयन के बारे में पता करने के लिए आया हुआ था। हमारी दो एकड़ जमीन है उसमें से एक एकड़ जमीन का पंजीयन हो पाया है एक एकड़ जमीन का पंजीयन नहीं हुआ है। ऐसा मैं अकेला नहीं हूं हजारों किसान है क्योंकि पंजीयन के लिए जो निर्धारित अवधि थी उसमें सर्वर डाउन पोर्टल की धीमी गति एवं गिरदावरी की विभिन्न समस्याओं के कारण पंजीयन नहीं हो पाया। हर किसी को उम्मीद थी कि एक बार तो समय सीमा बढ़ाई जाएगी पर वह नहीं बढ़ाई गई जिससे कई किसान वंचित हो गए हैं। ऐसे में आने वाली उपज की चिंता है कि उसे अब व्यापारी को औने पौने दामों में बेचना पड़ेगा। फि र भी समिति में हम पंजीयन के बारे में पूछने आ रहे हैं कि शायद चालू हो तो हम किसान लाभान्वित हो सके। क्योंकि हम समिति से कर्ज लेकर फसल लगाते हैं और आगे हमें यह कर्ज सोसायटी में जमा करने के लिए दिक्कत भी होगी। हम चाहते हैं कि एक बार पंजीयन चालू होना चाहिए।
पंजीयन से जो किसान चूक गए उनकी जानकारी हमने वरिष्ठ कार्यालय को दे दी है-ज्ञानचंद नेवारे
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक प्रबंधक ज्ञानचंद नेवारे ने बताया कि हमने खरीफ पंजीयन की तारीख बढ़ाने के लिए पत्राचार तो नहीं किया था। परंतु शासन के द्वारा निर्धारित अवधि की सूचना ग्रामीण स्तर तक हमने दे दी थी। पंजीयन से जो चूक गए हैं शेष बचे किसान की जानकारी हमने वरिष्ठ कार्यालय को दे दी है। वारासिवनी अंतर्गत १० सेवा सहकारी समिति में ८८८ किसान दर्ज है जो पंजीयन से वंचित हो गए। इसके अलावा भी कुछ लोग हैं गिरदावरी की जिनकी समस्या थी।
बाइट श्रीराम रहाँगडाले किसान










































