हूती हमलों और युद्ध के साए में फंसे गुना के उमरा जायरीन सुरक्षित लौटे वतन, 10 दिनों की दहशत के बाद जोरदार इस्तकबाल

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हूती विद्रोहियों के खतरनाक हमलों के चलते वहां फंसे गुना जिले के उमरा जायरीन आखिरकार सकुशल अपने वतन लौट आए हैं। उड़ानें ठप होने से करीब 10 दिनों तक दहशत के साए में रहने वाले इन जायरीनों के राघौगढ़ और एनएफएल पहुंचने पर परिजनों ने फूल-मालाओं और मुंह मीठा कराकर उनका जोरदार स्वागत किया।

गुना: सऊदी अरब और यमन के बीच सुलग रहे जंग के मैदान और हूती विद्रोहियों के खतरनाक हमलों के बीच वहां फंसे गुना जिले के उमरा जायरीन आखिरकार सकुशल अपने वतन हिंदुस्तान लौट आए हैं। मक्का-मदीना की मुकद्दस यात्रा के दौरान युद्ध के हालातों और उड़ानें ठप होने से करीब 10 दिनों तक दहशत और अनिश्चितता के साए में बिताने के बाद जब ये जायरीन अपने घर पहुंचे, तो परिजनों की आंखें छलक आईं। स्वजनों ने गले मिलकर, मुंह मीठा कराकर और फूल-मालाओं के साथ उनका जोरदार इस्तकबाल किया।

उड़ानें रद्द होने से थम गई थीं सांसें

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुना जिले के विभिन्न क्षेत्रों से करीब 30 से ज्यादा जायरीन अल किसवा इंटरनेशनल जैसी प्राइवेट ट्रैवल्स एजेंसी के माध्यम से 20 दिवसीय उमरा (छोटा हज) यात्रा पर मक्का-मदीना गए थे। इनमें एनएफएल पालिका बाजार स्थित फातिमा मस्जिद के इमाम हाफिज वसी अहमद, राघौगढ़ के शाहिद खान व उनकी पत्नी नजमा खानम, तथा शेखपुर के इस्माइल खान व उनकी पत्नी नसीबन बेगम समेत अन्य लोग शामिल थे।सऊदी अरब में फंसे थे सभी

इन सभी की वापसी की रिटर्न फ्लाइटें 18-19 अक्टूबर के आसपास थीं। लेकिन ठीक इसी दौरान यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के एयरपोर्ट्स और इलाकों को निशाना बनाकर हमले शुरू कर दिए गए। सुरक्षा कारणों के चलते भारतीय एयरलाइन कंपनियों ने अपनी उड़ानें अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दीं, जिससे गुना के ये जायरीन सऊदी अरब में ही फंस गए।

10 दिनों का खौफनाक इंतजार

एनएफएल पालिका बाजार निवासी इंजीनियरिंग छात्र बिलाल मंसूरी ने बताया कि इस 10 दिनों के लंबे अंतराल में जहां एक ओर युद्ध के भयानक मंजर और हमलों के खौफ ने अपनों की सांसें अटका रखी थीं, वहीं दूसरी ओर ट्रैवल्स कंपनी का पैकेज समाप्त होने के बाद वहां रुकने, खाने-पीने और अतिरिक्त खर्च की चिंता भी सताने लगी थी।

परिजनों ने लगाई थी बचाने की गुहार

स्थिति यह थी कि प्रति जायरीन 2 से 3 हजार रुपए प्रतिदिन का अतिरिक्त खर्च बढ़ने का संकट खड़ा हो गया था, जिसे लेकर परिजनों ने जिला प्रशासन व कलेक्टर से भी गुहार लगाई थी। हालांकि, इमाम हाफिज वसी अहमद ने बताया कि सऊदी में स्थानीय स्तर पर ठहरने और खाने-पीने की कोई बड़ी तंगी नहीं हुई, लेकिन अनहोनी के डर और उड़ानों की अनिश्चितता ने हर पल को भारी बना दिया था।

वतन लौटकर देश में अमन-चैन की मांगी दुआएं

आखिरकार कड़ी मशक्कत और हालात सामान्य होने पर जब फ्लाइट्स का संचालन शुरू हुआ और गुना के इन जायरीनों ने विमान में कदम रखा, तो आसमान में उड़ान भरते ही सभी ने राहत की सांस ली और परवरदिगार का शुक्रिया अदा किया। घर लौटने पर मुस्लिम समाज और परिजनों ने उनका भव्य स्वागत किया।

परिजनों ने लगाई थी बचाने की गुहार

स्थिति यह थी कि प्रति जायरीन 2 से 3 हजार रुपए प्रतिदिन का अतिरिक्त खर्च बढ़ने का संकट खड़ा हो गया था, जिसे लेकर परिजनों ने जिला प्रशासन व कलेक्टर से भी गुहार लगाई थी। हालांकि, इमाम हाफिज वसी अहमद ने बताया कि सऊदी में स्थानीय स्तर पर ठहरने और खाने-पीने की कोई बड़ी तंगी नहीं हुई, लेकिन अनहोनी के डर और उड़ानों की अनिश्चितता ने हर पल को भारी बना दिया था।

वतन लौटकर देश में अमन-चैन की मांगी दुआएं

आखिरकार कड़ी मशक्कत और हालात सामान्य होने पर जब फ्लाइट्स का संचालन शुरू हुआ और गुना के इन जायरीनों ने विमान में कदम रखा, तो आसमान में उड़ान भरते ही सभी ने राहत की सांस ली और परवरदिगार का शुक्रिया अदा किया। घर लौटने पर मुस्लिम समाज और परिजनों ने उनका भव्य स्वागत किया।

इस्तकबाल करने वालों में हाफिज शकील अहमद, सुलेमान मंसूरी, वाहिद अली, साबिर खान, नायब सदर फारुख खान, आमिर खान, अफ्फान और जुनैद सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे। मक्का-मदीना के पाक सफर से लौटे इन जायरीनों ने बताया कि उन्होंने अल्लाह के घर में अपने मुल्क हिंदुस्तान में अमन-चैन, आपसी भाईचारे, तरक्की और खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगी हैं।

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