मोती तालाब में मछली पकड़ने पर मचा घमासान, सहकारी समिति के सदस्य आमने-सामने

0

संचालक मंडल की वैधता और मत्स्याखेट के अधिकार को लेकर गहराया विवाद,
एक पक्ष ने मनमानी का लगाया आरोप तो दूसरे ने निष्कासित सदस्यों को बताया विवाद की वजह
फोटो
पदमेश न्यूज़। बालाघाट।नगर के मोती तालाब में रविवार से शुरू हुए मत्स्याखेट ने बालाघाट मछुआ सहकारी समिति के भीतर लंबे समय से चल रहे विवाद को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। तालाब में मछली पकड़ने को लेकर समिति के दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गलत तरीके से कार्य करने और समिति के नियमों की अनदेखी करने के आरोप लगा रहे हैं। एक पक्ष ने जहां पुलिस और सहकारिता उपायुक्त से हस्तक्षेप की मांग की है, वहीं दूसरे पक्ष ने विरोध करने वालों को समिति से निष्कासित सदस्य और बाहरी व्यक्ति करार दिया है। समिति के भीतर मत्स्याखेट के अधिकार को लेकर उपजा यह विवाद अब प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग तक पहुंच गया है।

संचालक मंडल के चुनाव से शुरू हुई विवाद की कहानी
मोती तालाब में मत्स्याखेट को लेकर वर्तमान विवाद की जड़ वर्ष 2023 में हुए बालाघाट मछुआ सहकारी समिति के संचालक मंडल के चुनाव से जुड़ी हुई है। चुनाव के करीब दो वर्ष बाद संचालक मंडल पर अनियमितता और गबन के आरोप लगाते हुए शिकायत की गई थी। शिकायत के आधार पर हुई जांच के बाद सहकारिता उपायुक्त ने संचालक मंडल को भंग करने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के खिलाफ संचालक मंडल ने संयुक्त पंजीयक सहकारिता के समक्ष अपील की। संयुक्त पंजीयक ने तकनीकी आधार पर सहकारिता उपायुक्त के आदेश को निरस्त कर दिया। इसी फैसले के बाद समिति के भीतर मत्स्याखेट को लेकर विवाद और गहरा गया।

बिना आमसभा के मत्स्याखेट शुरू करने का आरोप
समिति सदस्य सुदर्शन गंगापारे के पक्ष के लोगों का आरोप है कि संयुक्त पंजीयक के निर्णय के बाद संचालक मंडल मनमानी कर रहा है और अपने लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। सुदर्शन गंगापारे के अनुसार, उन्होंने संचालक मंडल की कथित मनमानी के संबंध में सहकारिता उपायुक्त से शिकायत की थी। शिकायत के बाद सहकारिता उपायुक्त ने आमसभा के माध्यम से मत्स्याखेट को लेकर निर्णय लेने की बात कही थी। इसके बावजूद संचालक मंडल ने आमसभा आयोजित किए बिना ही रविवार से मत्स्याखेट शुरू कर दिया।गंगापारे पक्ष का कहना है कि जब तक समिति की आमसभा में मत्स्याखेट को लेकर निर्णय नहीं हो जाता, तब तक इस तरह मत्स्याखेट शुरू करना उचित नहीं है। इसी के विरोध में उन्होंने पुलिस और सहकारिता उपायुक्त से हस्तक्षेप कर मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

दूसरे पक्ष ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, समिति सदस्य दीपक बर्वे ने दूसरे पक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संयुक्त पंजीयक सहकारिता के निर्णय के आधार पर समिति के सदस्यों ने रविवार से मत्स्याखेट प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वे समिति से निष्कासित सदस्य हैं और कुछ बाहरी लोग भी इसमें शामिल हैं। बर्वे के अनुसार, समिति में किसी भी प्रकार का मतभेद नहीं है और संयुक्त पंजीयक के निर्णय के बाद ही मत्स्याखेट शुरू किया गया है।

अब प्रशासनिक हस्तक्षेप पर टिकी निगाहें
मोती तालाब में मत्स्याखेट को लेकर समिति के भीतर दो पक्षों के आमने-सामने आने से विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। एक पक्ष आमसभा के बिना मत्स्याखेट शुरू करने को नियमों के विरुद्ध बता रहा है, तो दूसरा पक्ष संयुक्त पंजीयक के निर्णय को आधार बनाकर मत्स्याखेट को वैध ठहरा रहा है। ऐसे में अब पुलिस और सहकारिता विभाग के हस्तक्षेप से ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। समिति के भीतर संचालक मंडल की वैधता, सदस्यों की स्थिति और मत्स्याखेट के अधिकार को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशासन का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बहरहाल विवाद पर संबंधित विभाग और प्रशासन क्या कार्रवाई करता है फिलहाल सब की निगाहें इसी पर टिकी हुई है।
0000000000000000000000000000000

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here