वर्ष 2020 में मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे हुए क्षेत्र में कथित पुलिस नक्सली मुठभेड़ के दौरान मारे गए छत्तीसगढ़ निवासी झामसिंह धुर्वे के 1 पुत्र को वन विभाग में नौकरी दिए जाने का प्रस्ताव बीते दिनों सांसद ढाल सिंह बिसेन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान लिया गया लेकिन इस पूरे प्रस्ताव के बाद भी आदिवासी समाज शासन के इस फैसले से संतुष्ट होता दिखाई नहीं दे रहा है।
आदिवासी समाज संगठन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि अभी तक पीड़ित परिवार को सही न्याय नहीं मिला है इस मामले की सीबीआई जांच होना था तथा जिनके द्वारा झामसिंह की हत्या की गई है उन पर कार्यवाही किया जाना था, साथ ही पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा दिए जाने की मांग भी अभी तक पूरी नहीं हुई है, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने आगामी दिनों में और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इसी तरह अन्य पदाधिकारियों का भी कहना है कि पहले तो झामसिंह की मौत नक्सली मुठभेड़ में होना बताया गया था जब पूरे समाज द्वारा जन आंदोलन किया गया तब मामले की न्यायिक जांच कराने और पीड़ित परिवार को सहायता दिए जाने की बात प्रशासन द्वारा कही गई। जांच होने के बाद भी सही रिपोर्ट सामने नहीं आई है और पूरे परिवार को सही आर्थिक मदद भी नहीं मिली है, इस मुद्दे को आने वाले समय में और अच्छे से सामाजिक स्तर पर विचार विमर्श कर उठाया जाएगा।









































