आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर कसा तंज

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वर्ष 2003 के बाद मध्यप्रदेश में लगातार भाजपा की सरकार है इस बीच 15 माह के लिए जनादेश के अनुसार कमलनाथ की सरकार बनी लेकिन वह सरकार नहीं टिक सकी और 15 माह में ही धराशाई हो गई, क्योंकि वे अपने संगठन को जोड़ कर नहीं रख सके। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर यह तंज मध्यप्रदेश पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने एक कार्यक्रम के दौरान कसा। वे मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर नगर के पुलिस लाइन मैदान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

आपको बताये कि मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर पुलिस लाइन मैदान में मुख्य समारोह का आयोजन किया गया, जो आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान आयुष मंत्री रामकिशोर कावरे, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रमेश रंगलानी, भाजपा नेत्री मौसम हरिनखेड़े, नगरपालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर सहित कलेक्टर आईजी एसपी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण मौजूद रहे।

इस कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों द्वारा सामूहिक व्यायाम प्रदर्शन किया गया, जिसके बाद स्कूली छात्र छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। वहीं अंत में प्रतिभावान बच्चों को प्रमाण पत्र अतिथियों के हस्ते वितरित किया गया।

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन ने बताया कि 1 नवंबर 1956 को मध्यप्रदेश राज्य ने अपना पूरा रूप लिया। इसके पूर्व हमारी राजधानी नागपुर हुआ करती थी, 2003 से वर्ष 2020 तक बीच के 15 माह छोड़ दे तो इस दौरान मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान का कार्यकाल रहा जो अभी भी जारी है। राष्ट्र का निर्माण और जनता का कल्याण हमारी सरकार का संकल्प है, यह देश दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनने जा रहा है इस पर हम सबको गर्व होना चाहिए।

कार्यक्रमो के दौरान आयोग अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन विपक्ष को आड़े हाथ लेते ही है, इस कार्यक्रम के दौरान भी संबोधित करते हुए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी के ऊपर तंज कस ही दिया। आयोग अध्यक्ष श्री बिसेन ने कहा कि जनता के जनादेश अनुसार बीच में 15 माह के लिए कमलनाथ जी इस राज्य के मुख्यमंत्री बने, लेकिन वह सरकार नहीं चल सकी, वह सरकार 15 महीने में ही धराशाई हो गई। सरकार धरासायी होने के हम कारण नहीं है इसके लिए वे लोग कारण हैं जिन्होंने सरकार बनाई, लेकिन सरकार को और अपने संगठन को ठीक से समाहित करके जोड़कर नहीं रख सके।

आयोग अध्यक्ष श्री बिसेन यहीं नहीं रुके वर्षों पूर्व राशन दुकानों में वितरित किए जाने वाले लाल गेहूं को लेकर भी कमलनाथ जी को कटघरे में लिया। उन्होंने कहा कि पहले जो लाल गेहूं बटता था, वह लाल गेहूं ऑस्ट्रेलिया अमेरिका रसिया से बुलाया जाता था। यह वही लाल गेहूं था जिसे वहां पर मवेशियों के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, उस गेहूं को मंगाकर हिंदुस्तान की जनता की भूख मिटाई जाती थी। यह कहने में कोई संकोच नहीं उस समय विदेश वाणिज्य मंत्री कमलनाथ जी हुआ करते थे, विदेशों से समझौता कर विदेशों से गेहूं बुलाकर राशन दुकानों में बटवाते थे।

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