अमेरिका और ईरान के बीच फरवरी के आखिरी सप्ताह में शुरू हुई जंग भले ही थम गई है। लेकिन, इसकी वजह से ग्लोबल ऑयल सप्लाई को झटका लगा है, दुनिया को उससे उबरने में कई साल लगेंगे। IMF की पूर्व अर्थशास्त्री रह चुकीं गीता गोपिनाथ के मुताबिक भारत होर्मुज संकट की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है।
वहीं, वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल संगठन (WMO) के हिसाब से मई से जुलाई के बीच सुपर अल नीनो भारत को अपनी चपेट में ले सकता है। इस सिलसिले में IMD यानी भारत मौसम विभाग का कहना है कि इस साल सामान्य की तुलना में बारिश का लॉन्ग टर्म औसत 92% तक सिमट सकता है।
इस तरह भारत की इकोनॉमी पर दो बड़े खतरे मंडरा रहे हैं। इनमें से पहला खतरा, यानी होर्मुज संकट साफ दिख रहा है। जबकि, अल नीनो के तौर पर उपजा खतरा अदृश्य रूप से इकोनॉमी की सांस फुलाने की तैयारी कर रहा है।
असल में फरवरी 2026 में जब ईरान ने अमेरिकी हमले के बाद होर्मुज स्ट्रेट को बंद किया, तभी से पूरी दुनिया की नजरें उस संकड़े समुद्री रास्ते पर टिकी हैं, जहां से ग्लोबल ऑयल सप्लाई का 20 फीसदी कारोबार होता है। लेकिन, प्रशांत महासागर में समुद्र की गहराई में पानी के महज 2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म होने से उपजे अल नीनो पर अब ध्यान गया है।
जो खतरा दिख नहीं रहा, वो ज्यादा गहरा
मौसम वैज्ञानिक “Super El Niño” की चेतावनी दे रहे हैं। अल नीनो का ऐसा रूप जो डेढ़ सदी में पहली बार देखने को मिल सकता है। कुछ मौसम विज्ञान मॉडल इसे 140 साल का सबसे शक्तिशाली अल नीनो बता रहे हैं। अगर, अल नीनो की स्थिति चरम पर पहुंची, तो यह भारत के लिए होर्मुज से भी बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है। यहां, फर्क सिर्फ यह है कि होर्मुज की वजह से तेल के दाम में जो आग लगी है, उसकी तपिश सरकार और तेल कंपनियां सह सकती हैं। लेकिन, अल नीनो की वजह से आसमान से बरसने वाले शोले और अकाल जैसे हालात के सामने सब बेबस होंगे।
होर्मुज की चोट तीखी और सीमित
MUFG के अनुमान के अनुसार, हर $10 प्रति बैरल की तेल मूल्य वृद्धि भारत के चालू खाता घाटे को GDP के 0.4-0.5% तक बढ़ा देती है। वहीं, $100 प्रति बैरल पर यह घाटा बेसलाइन के 1.5% से बढ़कर 3% के करीब पहुंच सकता है। MUFG यह भी अनुमान लगाता है कि अगर संकट लंबा खिंचा और तेल $100 पर टिका रहा, तो USD/INR 95.50 के स्तर तक जा सकता है।
लेकिन यह एक बाहरी झटका है। तेल की कीमत बदलती है, सरकार रूस से खरीद बढ़ाती है, रुपया दबाव में आता है, फिर धीरे-धीरे संतुलन बनता है। BMI के अनुमान के अनुसार पूर्ण होर्मुज बंदी GDP को सीधे 0.5 प्रतिशत अंक तक नुकसान पहुंचा सकती है। यानी,
होर्मुज की चोट तीखी है, लेकिन सीमित है। इसके अलावा इससे निपटने की तैयारी की जा सकती है।









































