पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उपजे विवाद ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी थीं। आपको बता दें कि होर्मुज का यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए ‘लाइफलाइन’ माना जाता है। भारत अपनी एलपीजी (LPG) जरूरतों का लगभग 50-60 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग के जरिए खाड़ी देशों से मंगवाता है। अगर यह रास्ता बाधित होता है, तो देश के करोड़ों घरों में रसोई गैस की किल्लत पैदा हो सकती है। इसी संभावित संकट को भांपते हुए भारत सरकार ने अपनी खरीदारी नीति में एक ऐतिहासिक बदलाव किया है।
‘स्पॉट बाइंग’ का सहारा
अब तक भारत ज्यादातर एलपीजी की खरीदारी लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट के जरिए करता था। लेकिन मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए, भारत ने ‘स्पॉट मार्केट’ का रुख किया है। स्पॉट बाइंग का मतलब है कि भारत अब किसी एक देश या लंबे कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में जहां भी तत्काल गैस उपलब्ध होगी, वहां से खरीदारी करेगा। इससे न केवल आपूर्ति सुनिश्चित होगी, बल्कि अगर खाड़ी देशों से सप्लाई रुकती है, तो अन्य देशों से तुरंत गैस मंगवाई जा सकेगी। अप्रैल 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय तेल कंपनियां अब इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।
विकल्प की तलाश
सरकार का दूसरा बड़ा फैसला यह है कि अब भारत केवल खाड़ी देशों (कतर, यूएई, सऊदी अरब) पर निर्भर नहीं रहेगा। भारत अब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कुछ अफ्रीकी देशों से भी एलपीजी खरीदने की संभावनाएं तलाश रहा है और सौदे कर रहा है। आपूर्ति के स्रोतों को बांटने से यह फायदा होगा कि अगर किसी एक क्षेत्र में युद्ध या तनाव के कारण रास्ता बंद होता है, तो दूसरे छोर से गैस की आवक बनी रहेगी। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
घरेलू बाजार पर क्या होगा असर?
आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस नए तरीके से खरीदारी करने पर एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ जाएंगे? विशेषज्ञों का मानना है कि स्पॉट मार्केट में कीमतें अंतरराष्ट्रीय मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होती हैं, जो कभी-कभी महंगी भी पड़ सकती हैं। हालांकि, सरकार का प्राथमिक उद्देश्य अभी कीमत से ज्यादा ‘उपलब्धता’ सुनिश्चित करना है। सरकार बफर स्टॉक (Buffer Stock) बनाने पर भी जोर दे रही है ताकि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अस्थिर होती हैं, तो घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके।
सुरक्षित परिवहन और लॉजिस्टिक्स
होर्मुज के रास्ते में बढ़ते खतरों को देखते हुए भारत अपनी शिपिंग कंपनियों को भी सतर्क कर रहा है। गैस लाने वाले जहाजों के लिए वैकल्पिक समुद्री रास्तों और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर चर्चा की जा रही है। भारत की पेट्रोलियम मिनिस्ट्री लगातार विदेशी मंत्रालयों के संपर्क में है ताकि ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर कोई आंच न आए। यह नया बदलाव यह भी दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक संकटों के प्रति ‘रिएक्टिव’ होने के बजाय ‘प्रोएक्टिव’ हो गया है और संकट आने से पहले ही उसका समाधान खोज चुका है।










































