Form 6 में बदलाव को लेकर कांग्रेस का CEC पर निशाना, सुप्रीम कोर्ट से ज्ञानेश कुमार को जवाबदेह ठहराने की मांग

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सुझाव के अनुसार CEC ज्ञानेश कुमार को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।CEC Gyanesh Kumar: कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा तरीके से फॉर्म 6 (Form 6) में बदलाव करके कानून और संवैधानिक परंपराओं का जानबूझकर उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जवाबदेही तय करने की अपील की है। रमेश ने दोहराया कि CEC ज्ञानेश कुमार को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

जयराम रमेश का हमला

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सुझाव के अनुसार CEC ज्ञानेश कुमार को तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। जयराम रमेश ने दावा किया कि शुक्रवार देर रात घबराए हुए चुनाव आयोग ने अधिकारियों को युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन शिविर आयोजित करने और सोशल मीडिया के जरिए इसका व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए। लेकिन CEC ने खुद ही फॉर्म 6 में एक अवैध और असंवैधानिक बदलाव करके युवा मतदाताओं को जोड़ना लगभग असंभव बना दिया था। फॉर्म में एक नया अनिवार्य सेक्शन जोड़ा गया है, जिसमें पूछा गया है कि क्या आपके माता-पिता या दादा-दादी पिछली SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) सूची में थे। यह पहली बार वोट देने वाले Gen Z (युवा) मतदाताओं के लिए एक बड़ी बाधा बन गया है।

कांग्रेस के 3 प्रमुख आरोपजुलाई 2026 की शुरुआत में बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना या सार्वजनिक जानकारी के चुपचाप ऑनलाइन फॉर्म 6 में बदलाव कर दिया गया।

चुनावी कानून का उल्लंघन (नियम उल्लंघन 2)

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) के तहत फॉर्म 6 में संशोधन करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है, चुनाव आयोग के पास नहीं। यह चुनाव आयोग द्वारा अपने अधिकारों का सीधा अतिक्रमण है।

संसद की अनदेखी (नियम उल्लंघन 3)

‘मतदाताओं का पंजीकरण नियम, 1960’ (Registration of Electors Rules, 1960) के तहत शासित नियमों में बिना किसी संशोधन के फॉर्म बदल दिया गया। यह काम केवल केंद्र सरकार संसद को उचित सूचना देकर ही कर सकती है। एक वैधानिक फॉर्म को CEC ने एकतरफा तरीके से बदल दिया।

जयराम रमेश ने यह भी दावा किया कि आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने भी इस अवैध और अनधिकृत बदलाव को वापस लेने की मांग की थी, ताकि नए युवा मतदाता बिना किसी उत्पीड़न के अपना पंजीकरण करा सकें।

“इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बनें CEC”

जयराम रमेश ने कहा कि कानून लागू करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति ही कानून तोड़ रहा है, जो भारतीय लोकतंत्र के पतन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के पास अभी भी खुद को साबित करने का मौका है—वे अपने पद से इस्तीफा दें और राहुल गांधी के सुझाव के मुताबिक सरकारी गवाह बन जाएं, देश का युवा इस कदम का स्वागत करेगा।

चुनाव आयोग का पक्ष और आंकड़े

फॉर्म 6 में नए मतदाताओं के लिए घोषणापत्र जोड़ने और पंजीकरण प्रक्रिया को कठिन बनाने के विवाद के बीच चुनाव आयोग के अधिकारियों ने अपना रुख स्पष्ट किया है। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल जून में बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभ्यास शुरू होने के बाद से 18 से 28 वर्ष के आयु वर्ग के 2.37 करोड़ से अधिक मतदाताओं को मतदाता सूची में जोड़ा गया है।

माता-पिता की SIR डिटेल जरूरी

ऑनलाइन फॉर्म में किए गए बदलाव के बाद, नए मतदाताओं को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरते समय अपने माता-पिता या पूर्वजों के SIR विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया है। जब तक यह जानकारी नहीं भरी जाती, फॉर्म में आगे नहीं बढ़ा जा सकता।

आयोग की सफाई

चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह घोषणापत्र केवल जारी किए गए निर्देशों के माध्यम से जोड़ा गया है और मूल फॉर्म 6 में कोई वैधानिक संशोधन नहीं किया गया है।

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