नई दिल्ली: साल 1996 में ओडिशा में 12वीं कक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर ABVP के तत्कालीन राष्ट्रीय सचिव धर्मेंद्र प्रधान ने राज्य सरकार के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था। उसके बाद उनकी छवि एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर हुई। इत्तेफाक की बात है कि जिस पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे को लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने करीब 30 साल पहले मोर्चा खोला था, उसी पेपर लीक मुद्दे को लेकर उन्हें शनिवार को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
केंद्र सरकार ने शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्ष की मुख्य मांग मान ली। इसके साथ ही धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। मोदी सरकार के 12 साल से अधिक के कार्यकाल में किसी कैबिनेट मंत्री को इस तरह हटाए जाने की यह एक अभूतपूर्व घटना है। जिससे बीजेपी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। साथ ही उसके विरोधियों को एक बढ़त मिली है।









































